जवाहर नवोदय विद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य कार्यशाला आयोजित, छात्रों को परीक्षा के तनाव से बचने के टिप्स दिए
शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। जवाहर नवोदय विद्यालय बघरा में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों में बढ़ते तनाव व परीक्षा के समय होने वाले तनाव को रोकने के लिए मार्गदर्शन किया गया। इस दौरान विद्यालय की प्रिंसिपल सुमनलता यादव, वॉइस प्रिंसिपल करन सिंह, बीसी प्रजापति, यूसी यादव, राजवीर सिंह, मौहम्मद अजमल, अख्तर जमाल, अनुपमा द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।
नोडल अधिकारी डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा टॉप करे, उनका नाम रोशन करे। एक अभिभावक यह चाहेगा ही, इसमें गलत कुछ नहीं है। गलत तब है, जब अंकों की यह भूख बच्चे की क्षमता से आगे निकल जाए। उन्होंने कहा कि अगर पता है कि बच्चा ज्यादा अंक नहीं ला पाएगा, फिर भी दबाव बनाते हैं तो यह बहुत ही खतरनाक है। बच्चा क्या बनना चाहता है, उसे क्या पसंद है, वह क्या करना चाहता है, माता-पिता सिर्फ इसी पर अपना फोकस करें।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ० मनोज कुमार ने कहा कि परीक्षाओं का मौसम आ चुका है। इस समय विद्यार्थियों में तनाव का होना लाजिमी है, लेकिन जब यह मान लिया जाता है कि अंक न हों तो कुछ नहीं तब यह तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि अंक महत्वपूर्ण जरूर हैं, पर जिंदगी नहीं। डॉ. मनोज ने अध्यापकों व छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूक किया और परीक्षा के समय होने वाले तनाव को कम करने के टिप्स दिए और छात्रों से उनके विचार भी जाने। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति कभी भी मानसिक रोग से ग्रसित हो सकता है। यदि नींद कम आना, सिर भारी रहना, उत्साह में कमी, डर लगना, बहुत जिद्दी होना, ज्यादा गुस्सा करना, अवसाद, नशा के कारण, याददाश्त में कमी, उलझन एवं घबराहट तथा बेचैनी आदि लक्षण दिखाई दें तो यह मानसिक रोग हो सकता है। ऐसे लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
विद्यालय की प्रिंसिपल सुमनलता यादव ने बच्चों को तनाव मुक्त रहने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों, दोनों को यह समझना जरूरी है कि अंक ही जीवन का आधार नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि जीवन बहुत बड़ा है और बहुत कुछ देता है। इस दौड़ को अपने दिमाग पर हावी नहीं होने देना है। उन्होंने कहा कि बस मन और शांत दिमाग से पढ़ाई करनी है और हमेशा सकारात्मक रहना है। आपका खुद पर विश्वास होना बहुत जरूरी है और यह विश्वास तभी बनेगा जब आप अच्छी तरह से पढ़ाई कर पाओगे।