एमएससी(माइक्रोबायोलाॅजी) एवं एमएससी(बायोटेक्नोलाॅजी)  के प्रथम और तृतीय सेमेस्टर के परिणाम घोषित, श्री राम ग्रुप ऑफ़ काॅलेजेज के छात्र-छात्राओं ने गाड़े सफलता के झंडे


शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। विश्वविद्यालय द्वारा घोषित एमएससी(माइक्रोबायोलाॅजी) एवं एमएससी(बायोटेक्नोलाॅजी)  के प्रथम और तृतीय सेमेस्टर के अच्छे परिणाम से बायोसाइंस संकाय में आज हर्ष का माहौल था। इन विषयों के अच्छे परिणामों ने आज काॅलेज के बायोसाइंस संकाय की उपलब्धियों में एक ओर नया आयाम जोड दिया है। विश्वविद्यालय द्वारा घोषित परीक्षा परिणाम के एमएससी(माइक्रोबायोलाॅजी) प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में जहरा हुसैनी ने 88.2 प्रतिशत अंक प्राप्त करके प्रथम स्थान पर, फरहा 86.4 प्रतिशत अंक प्राप्त करके द्वितीय स्थान पर व राशि पतलन 82.8 प्रतिशत अंक के साथ तृतीय स्थान पर रही तथा वही एमएससी(माइक्रोबायोलाॅजी) तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा में 85 प्रतिशत अंक प्राप्त करके हुमा राणा ने प्रथम स्थान, 83.8 प्रतिशत अंक प्राप्त करके निव्या चैधरी ने द्वितीय स्थान एवं 82.4 प्रतिशत अंक प्राप्त करके रूपा रानी तृतीय स्थान पर रही।



एमएससी(बायोटैक्नोलाॅजी) प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में दीपशिखा ने 83.2 प्रतिशत अंक प्राप्त करके प्रथम स्थान, अन्नु ने 82.8 प्रतिशत अंक प्राप्त करके द्वितीय स्थान एवं अपूर्वा ने 82.2 प्रतिशत अंक प्राप्त करके तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं एमएससी(बायोटैक्नोलाॅजी) तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा में अनम 88 प्रतिशत अंक प्राप्त करके प्रथम स्थान, नीलिमा तोमर 86.6 प्रतिशत अंक के साथ द्वितीय स्थान पर तथा रितिका राजपूत 85.6 प्रतिशत अंको के साथ तृतीय स्थान पर रही।  
इस अवसर पर श्रीराम काॅलेज के निदेशक डा0 आदित्य गौतम ने विद्यार्थियों की सफलता के लिये बायोसाइंस संकाय के सभी प्रवक्ताओं को प्रोत्साहित किया तथा विद्यार्थियों को इसी तरह सफलता प्राप्त करके महाविद्यालय का नाम रोशन करने हेतु भविष्य में कठिन परिश्रम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता में जहां विद्यार्थियों का कठिन परिश्रम एवं लगन की आवश्यकता होती है। 



इस अवसर पर बायोसाइंस के विभागाध्यक्ष डा0 सौरभ जैन ने कहा कि अपने विद्यार्थियों की सफलता पर वह गर्वान्वित है। इसके लिये बायोसाइंस संकाय के सभी प्रवक्ताओं डा0 अश्वनी कुमार, विकास त्यागी, अंकित, डा0 समीक्षा, लवि, छवि, शैवी, अनुश्री, सायमा, रोहिणी, आस्था, तथा सुबोध का योगदान रहा।