देश के दो प्रमुख पत्रकारों अजीत अंजुम और आरफा खानम शेरवानी को मिला कुलदीप नैयर अवार्ड

सुरेंद्र सिंघल/गौरव सिंघल, नई दिल्ली। गांधी शांति प्रतिष्ठान की ओर से पत्रकार अजीत अंजुम को वर्ष 2021 और पत्रकार आरफा खानम शेरवानी को वर्ष 2022 का कुलदीप नैयर एवार्ड प्रदान किया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित राजेंद्र भवन सभागार में गांधी शांति प्रतिष्ठान के तत्वावधान में आयोजित कुलदीप नैयर पत्रकारिता समारोह में मनोविज्ञान के प्रख्यात प्रोफेसर और सेंटर फार स्टडी आफ डेवलेपिंग सोसाइटीज के निदेशक आशीष नंदी, गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने अजीत अंजुम और आरफा खानम शेरवानी को एक-एक लाख रूपए का चैक प्रशिस्त पत्र प्रदान किया और शाॅल उढाकर सम्मानित किया।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर आशीष नंदी ने कहा कि पत्रकारों और लेखकों को कुलदीप नैयर से प्रेरणा लेनी चाहिए जो कभी भी सत्ता के आगे नहीं झुके और उन्होंने सभी तरह के दबावों के सामने निर्भीक और स्वतंत्र पत्रकारिता करने का साहस दिखाया। गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष एवं देश के ख्याति प्राप्त लेखक और प्रख्यात गांधीवादी कुमार प्रशांत ने बडी संख्या में समारोह में पहुंचे पत्रकारों, लेखकों, बुद्धिजीवियों का आभार जताया और कहा कि उनकी जोरदार उपस्थिति निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के मार्ग को आसान बनाएगी और उसे मजबूत संबल देने का काम करेगी। इससे हमें गांधी के मूल्यों पर अडिग रहने और उनके विचारों को आगे बढाने में सहायता मिलेगी। समारोह का संचालन समाजवादी चिंतक विजय प्रताप ने किया। गांधी शांति प्रतिष्ठान के मंत्री एवं वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार ने कहा कि गांधी शांति प्रतिष्ठान ने पहला एवार्ड 2017 में देश के लोकप्रिय टीवी पत्रकार एनडी टीवी के एंकर रविश कुमार को दिया था, 2018 में यह पुरस्कार मशहूर मराठी पत्रकार निखिल वागले को दिया गया था। 2019 और 2020 के पुरस्कारों का चयन कोरोना संकट के चलते नहीं हो पाया था। समारोह मंच पर वरिष्ठ पत्रकार पूण्य प्रसूण वाजपेयी, जयशंकर गुप्त, अजीत अंजुम, आरफा खानम शेरवानी, विजय प्रताप, अशोक कुमार, प्रोफेसर आशीष नंदी और कुमार प्रशांत विराजमान थे। सभी ने अपने सारगर्भित विचार रखे। पत्रकार मनीषा पांडे और संजय सिंह का भी संबोधन रहा। सम्मानित दोनो पत्रकारों ने गांधी शांति प्रतिष्ठान का उन्हें कुलदीप नैयर एवार्ड प्रदान किए जाने पर आभार जताया। 
सभी वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में स्वत्रंत और निर्भीक पत्रकारिता का सबसे ज्यादा महत्व है। पत्रकारों को हमेशा इंदिरा गांधी के आपातकाल के दौरान पत्रकारिता और पत्रकारों का दमन करने जैसी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। सत्ता का चरित्र एक सा होता है और अतीत में भी यह देखने में आया है कि सत्ताधीशों को अपनी आलोचना सहन नहीं होती है। लेकिन लेखकों और पत्रकारों को अपनी स्वत्रंत अभिव्यक्ति और लेखन का जज्बा कम नहीं होने देना चाहिए। चाहे उन्हें इसके लिए कितनी भी कीमत क्यों न अदा करनी पडे। कई वक्ताओं ने जनसत्ता के संपादक रहे प्रभाष जोशी की पत्रकारिता की भी सराहना की और कहा कि उन्होंने हमेशा विपरीत परिस्थितियों का साहस से सामना किया और सच को दबने नहीं दिया। आज भी पत्रकारों को कुलदीप नैयर और प्रभाष जोशी जैसी पत्रकारिता करनी चाहिए। समारोह में वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वर्द राजन, जान दयाल, मीम अफजल, अरूण त्रिपाठी आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। गांधी शांति प्रतिष्ठान की ओर से इन दोनो पत्रकारों का चयन करने के विषय में कहा गया कि उन्होंने आज के इस ऐसे दौर में अपनी विशेष छाप छोडी है। जब कलमों और आवाजोें को चुप करने या अपनी मुट्ठी में करने का सुनियोजित प्रयास चल रहा है और पत्रकारिता अधिकांशतः घुटनों के बल चलती नजर आ रही है। वह बडी सामाजिक जिम्मेदारी वहन कर रहे है। जयशंकर गुप्त ने अजीत अंजुम केे बतौर पत्रकार उनके योगदान और व्यक्तित्व के बारे में बताया। अशोक कुमार ने आरफा खानम शेरवानी का परिचय दिया। सम्मानित दोनो पत्रकारों ने प्रभावी ढंग से आज के हालात का उल्लेख किया और बताया कि आज का दौर पत्रकारों के लिए क्यों और कितना चुनौतीपूर्ण है और कैसे अनेक पत्रकार तमाम तरह के जोखिम उठाकर और कठिनाइयां झेलकर अपने सामाजिक और पत्रकारीय दायित्व का निर्वहन कर रहे है।