रेखार्जुन

रेखा घनश्याम गौड़, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

एक उसके होने से जिन्दगी थी मेरी,
वो साथ छोड़ कर क्या गया,
मेरे चेहरे की हँसी ले गया।

उसके साथ होते महकती फिरती हर जगह,
आईना देख कर खुद को निहारते न थकती थी।

जिस किसी से सुन लेती उसके आने की खबर,
नंगे पाँव भागी-दौड़ी चली जाती थी।

तुम्हारे जाने से जैसे,
खुशी को फिज़ायें खा गयीं।
ईश्वर को हमारे लिए,
बद्दुआयें रास आ गयीं।

आखों की कोरें रो-रो कर 
ज़ार-ज़ार हो गयीं।
ये जिन्दगी जो बहुत सुन्दर थी किसी वक़्त,
विरह मेरी नसों का खून पीती सांसें तार-तार हो गयी।
जयपुर, राजस्थान

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