गुरु सब धन की खान रे

डॉ अवधेश कुमार "अवध", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

गुरु से शिक्षा गुरु से दीक्षा, गुरु सब धन की खान रे ।

गुरु जैसा नहिं दूजा कोई, बात हमारी मान रे ।।

गुरु के चरणों में जन्नत है, मुख पर वेद पुरान रे ।

शास्त्र शस्त्र विज्ञान ध्यान सब, गुरुवर की पहचान रे ।।

 

जो भी गुरु के द्वारे आता, बन जाता विद्वान रे ।

साधारण प्राणी पा जाता, विद्या धन का दान रे ।।

गुरु की महिमा धरती जैसी, जाने सकल जहान रे ।

ज्ञान हेतु हरि गुरु घर आते, जिसने रचा विधान रे ।।

 

तमस रात्रि में अरुणोदय बन, लाते यही विहान रे ।

कोई कितना भी ऊँचा हो, गुरुवर प्रमुख महान रे ।।

इधर उधर मत भटको बंदे, गुरु से ही कल्यान रे ।

ईश्वर से पहले गुरु पूजें, जै जै कृपा निधान रे।।

 


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