अग्रभागवत कथा कथा का तीसरा दिन, अग्रसेन-माधवी विवाह की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु


शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। अग्रभागवत कथा के तीसरे दिन सत्यप्रकाश रेशू व सत्यप्रकाश मित्तल ने सपरिवार यजमान के रूप में पूजन, आरती कराई। आचार्य विष्णुदास शास्त्री ने कल बताए गए अग्रसेन जी की शिक्षा, भगवान श्रीकृष्ण जी का उपदेश एवं महालक्ष्मी जी द्वारा अग्रवंश की कुलदेवी बनने का वरदान आदि प्रसंग को आगे बढ़ाया।कथावाचक ने बताया कि गर्गाचार्य जी के निर्देशानुसार अग्रसेन जी ने मरूभूमि के ऊंचे-ऊंचे टीलों की खुदाई करवाई। फलस्वरूप मरुभूमि से अक्षय स्वर्ण भंडार मिला। जिससे उन्होंने "आग्रेयपुरी" का निर्माण करवाया। उन्होंने यह भी बताया कि जो मानव, मातृशक्ति की सेवा में, स्वयं को समर्पित कर देता है उसे निश्चित ही अक्षय कृपा का फल प्राप्त होता है।



आज की कथा में नागलोक के राजा महिधर की पुत्री माधवी से महाराजा अग्रसेन जी  के विवाह का प्रस्तुतीकरण झांकी के द्वारा दर्शाया गया। साथ ही समाज को यह संदेश भी दिया कि विवाह रात्रि में ना करके दिन में संपन्न कराया जाए। जिससे फेरों की प्रक्रिया सही समय पर संपन्न हो सके तथा नवयुगल का दांपत्य जीवन सुखमय हो। ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री सत्यप्रकाश मित्तल जी ने सभी अग्र बंधुओं से अनुरोध किया कि सपरिवार अग्रभागवत कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ उठाएं। इस अवसर पर सत्यप्रकाश मित्तल, मुख्य कथा संयोजक विनोद सिंहल, पुरुषोत्तम सिंहल, प्रदीप गोयल, श्याम लाल बंसल, तेजराज गुप्ता, संजय गुप्ता, आशुतोष कुच्छल, पवन सिंघल, मित्तसैन अग्रवाल, अचिन कंसल, मुकेश गोयल आदि मुख्य रूप से कथा में उपस्थित थे।



आज की कथा में मुख्य यजमान सत्यप्रकाश मित्तल अध्यक्ष सपत्नी और यजमान सत्यप्रकाश रेशू सपत्नी परिवार सहित उपस्थित थे। महाराजा अग्रसेन जी संग माधुरी विवाह की सुन्दर झाँकी योगेंद्र मित्तल के पुत्र अंकुश मित्तल एवं पुत्रवधू निकिता मित्तल द्वारा बहुत ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत की गयी। आज की कथा में कपिल देव अग्रवाल राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उत्तर प्रदेश सरकार भी कथा में उपस्थित रहे।