प्रधानमंत्री की पर्यटन से जुड़ी कल्पनाओं को धरातल पर उतार रहा उत्तर प्रदेश

सचिन गुप्ता, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के तत्वाधान में राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के होटल अशोक में आयोजित बोधि यात्रा के आयोजन कार्यक्रम में मुख्य रूप से बतौर अतिथि केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत व उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव डीएन मिश्रा, प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम, विभिन्न देशों के राजदूत, उच्चायुक्त एवं उच्चायोग के अधिकारियों के साथ-साथ कई विभागों के सचिव और अपर मुख्य सचिव मौजूद रहे। इस अवसर पर प्रतिष्ठित ट्रैवल राइटर, ब्लॉगर, टूर एंड ट्रैवल प्रतिनिधियों के साथ-साथ भारतीय व अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ के प्रतिनिधि भी मुख्य रूप से मौजूद रहे।      

कार्यक्रम उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की विशेष सचिव ईशा प्रिया ने उत्तर प्रदेश में बौद्ध विरासत स्थलों, पर्यटन आकर्षण, पारंपरिक कला व शिल्प और संस्कृति एवं पर्यटन क्षेत्र में एफडीआई को बढ़ावा देने के लिए निवेश के अवसर तथा उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति- 2022 के लाभों और सब्सिडी के विवरणश् विषय पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम के संवाद सत्र में पर्यटन के दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश में बौद्ध विरासत स्थलों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को बढ़ावा देने के प्रयासों पर सार्थक चर्चा हुई।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत में अपने संबोधन में बोधि यात्रा आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अक्सर अपने भाषणों में कहा है कि भारत युद्ध की नहीं, बुद्ध की भूमि है। इसी पवित्र भूमि ने समूची दुनिया को सत्य, अहिंसा, दया और करुणा का संदेश दिया। केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है। यहां पर्यटन की सभी अपेक्षाओं को पूरा करने की क्षमता भारत में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश में विभिन्न टूरिस्ट सर्किट बनाने की कल्पना की थी, उसमें पहला सर्किट बुद्ध सर्किट है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह का मैं अभिनंदन करना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश शासन ने प्रधानमंत्री की कल्पनाओं को धरातल पर उतारने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया।

केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया का नजरिया बदला है। उन्होंने कहा कि आज सांस्कृतिक रूप से भारत के प्रति आकर्षण और बढ़ा है। उन्होंने कहा कि बौद्ध सर्किट के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का विशेष तौर पर आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि जापान, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, म्यांमार, कंबोडिया, श्रीलंका, इंडोनेशिया जैसे बौद्ध देशों से प्राचीन भारतीय हिंदू बौद्ध सांस्कृतिक संबंध का विशेष जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या धाम और प्रभु श्रीराम से भी इन देशों का आत्मीय जुड़ाव तो हजारों वर्ष से अधिक पुराना है।  

उत्तर प्रदेश के पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित बोधि यात्रा का उद्देश्य राज्य में बौद्ध विरासत और तीर्थ स्थलों की झलक पेश करना है। उत्तर प्रदेश में भगवान बुद्ध और बौद्ध धर्म से जुड़े कई प्रमुख तीर्थ स्थल हैं। उन्होंने कहा कि यूपी प्रारंभिक बौद्ध धर्म का केंद्र रहा है, यहीं से बौद्ध धर्म का विस्तार दुनिया के बाकी हिस्सों में हुआ। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म को मानने वाले श्रद्धालुध्पर्यटक प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में देश-दुनिया से उत्तर प्रदेश आते हैं, बोधि यात्रा बुद्ध के जीवन, अनुभव और उपदेशों के महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रस्तुत करना है। जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से चैथा सबसे बड़ा राज्य है। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ आबादी वाला सबसे बड़ा प्रदेश तथा जनसंख्या की तुलना में विश्व के पांचवें देश के बराबर है। उन्होंने कहा कि सौभाग्य से भगवान बुद्ध के जन्म से लेकर शिक्षा, ज्ञान प्राप्ति, उपदेश एवं धार्मिक जनजागृति के अभियान एवं महापरिनिर्वाण (मृत्यु) तक के सभी स्थल उत्तर प्रदेश में ही अवस्थित हैं। उन्होंने कहा कि लुम्बिनी भारत की सीमा से मात्र 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो बुद्ध की जन्मस्थली है। उन्होंने कहा कि इनके जन्म के उपरान्त पिता शुद्धोधन की राजधानी कपिलवस्तु आ गई, जो उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद में स्थित है। वह कपिलवस्तु से ही वैराग्य जीवन में आ गए। ज्ञान प्राप्ति के उपरान्त उन्होंने पहला उपदेश सारनाथ में दिया। 

यूपी के पर्यटन मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी बौद्ध स्थलों को राजमार्गध्एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश में 06 एक्सप्रेस-वे संचालित, 07 एक्सप्रेस-वे निर्माणाधीन हैं। उन्होंने कहा कि भारत का सबसे लम्बा गंगा एक्सप्रेस-वे 594 किमी0 का निर्माण चल रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा एक्सप्रेस-वे वाला प्रदेश बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से बौद्ध स्थलों तक पहुंचना सुगम हो गया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल एयरपोर्ट- कुशीनगर, वाराणसी, लखनऊ, जेवर (नोएडा) एवं अयोध्या सभी संचालित हैं, इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में 16 घरेलू हवाई अड्डे भी संचालित हैं। जयवीर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत पांचवी नंबर की अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। वर्ष 2027 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को तीसरे नंबर और 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के रूप में प्रतिस्थापित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा राज्य होने के नाते प्रधानमंत्री के संलल्प को पूरा करने में जुटा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी को 01 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था वाला अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प लिया गया है, जिसमें पर्यटन उद्योग का विशेष योगदान है।

जयवीर सिंह ने कहा कि कुछ विदेशिक शक्तियों द्वारा जिनका बौद्ध धर्म के उद्गम, शिक्षा, उपदेश, दर्शन एवं आध्यात्म की कभी कोई संचेतना नहीं रही है, वे नकली रूप से अपने देश को बौद्ध धर्म के अनुयायी के रूप में विश्व पटल पर दिग्दर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बौद्ध अनुयायियों को कपोल कल्पित सूचनातंत्र के माध्यम से उन्हें भ्रमित कर बौद्ध धर्म के नाम पर अपने देश में पर्यटन बढ़ाने के लिए षडयंत्र रच रहे हैं। 

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि बुद्ध की जन्मस्थली भले लुम्बिनी रही, लेकिन उनकी कर्मभूमि उत्तर प्रदेश रहा है। उन्होंने कहा कि कपिलवस्तु से बुद्ध ने जो यात्रा शुरू की, वो श्रावस्ती, कपिलवस्तु, सारनाथ सहित अन्य स्थलों से होते हुए आगे बढ़ा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश बौद्ध धर्म का उद्गम स्थल है और यह बोधि यात्रा आपको भगवान बुद्ध की शांति और दिव्यता का अनुभव कराने की एक पहल है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म की महत्वपूर्ण घटनाएं उत्तर प्रदेश में हुईं और इस आयोजन का उद्देश्य इन बौद्ध स्थलों को वैश्विक मानचित्र पर बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन के तहत काम करते हुए और राज्य सरकार और पर्यटन विभाग के निरंतर प्रयासों से हमने इन स्थलों पर बुनियादी ढांचे और विश्व स्तरीय पर्यटक सुविधाओं का विकास किया है, जो देश के शीर्ष पर्यटन स्थलों के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी निवेशक-अनुकूल पर्यटन नीति के माध्यम से, हितधारक पर्यटन क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की इस परिवर्तनकारी यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। 

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय की सचिव वी. विद्यावती ने में कहा कि बुद्ध उत्तर प्रदेश के दिल और आत्मा में बसते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर भारत सरकार का उद्देश्य न केवल बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए एक यादगार अनुभव बनाना है, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए विकास और बेहतर रोजगार के अवसर सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा कि हम राज्य में बौद्ध संग्रहालयों के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बढ़ाने के लिए भी उत्सुक हैं, क्योंकि वे इतिहास का एक जीवंत स्रोत हैं।

प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने स्वागत भाषण में कहा कि उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटन में नंबर एक स्थान प्राप्त करते हुए एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि हमें निकट भविष्य में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों के उत्तर प्रदेश आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि हम दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के विभिन्न देशों के साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को और बेहतर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय के सहयोग से सांस्कृतिक-कूटनीति में सुधार कर राज्य में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमने मंदिरों और गेस्ट हाउस के निर्माण के लिए पहले ही भूटान सरकार को वाराणसी में 02 एकड़ जमीन आवंटित की है। उन्होंने कहा कि इस मंच के माध्यम से हम अन्य देशों को उत्तर प्रदेश में बुद्ध से जुड़े सभी छह स्थलों के आतिथ्य और पर्यटन क्षेत्र में निवेश करने की पेशकश करते हैं।

बोधि यात्रा कार्यक्रम में भूटान, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, श्रीलंका, लाओ पीडीआर, कंबोडिया, वियतनाम, इंडोनेशिया, सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया, मंगोलिया, चीन आदि देशों के राजदूत, उच्चायुक्त एवं उच्चायोग के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

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