तलाक़शुदा दामिनी ( लघुकथा)
मदन सुमित्रा सिंघल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
दामिनी बिजली के प्रवाह से वाकपटूता एवं कुशल व्यवहार के कारण बचपन से ही दिनरात विद्यालय से लौटने के बाद एवं पहले इतने घर दुकान एवं लोगों के काम धङाधङ कर देती तो आज वो पीएचडी करके शहर में अपने घर आयी तो मुह्ह्ल्ले वालों ने रास्ते में बताया कि दामिनी तू माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाचार्य नियुक्त हो गई लेकिन विधायक जी धोलपुर जाकर शिक्षा मंत्री से मिलकर अपने शहर गिदङबाहा में ही नियुक्ति करवाने के लिए गए हैं। दामिनी कुछ नहीं बोली क्योंकि सबको पता था कि विधायक रघुनंदन सिंह एवं दामिनी एक साथ पढ़े। दिमिनि निजी स्कूलों में अस्थायी रूप से अध्यापन करने लगी वही रघुनंदन सिंह राजनीति में चला गया लेकिन विजातीय विवाह की सहमति ना होने के कारण दोनों तीस पार कर गए। 
चंचल एवं तीव्र गति से चलने वाली दामिनी एवं रघुनंदन ने गुप्त रूप से विवाह कर लिया किसी को भनक तक नहीं लगी। वही दामिनी की पोस्टिंग भी हो गई। दोनों व्यस्त एवं अलग अलग रहने के कारण तथा गुप्त विवाह के भंवरजाल में फंसे रहे। एक दिन दोनों ने आम सहमति से तलाक़ ले लिया तो गुप्त विवाह एवं तलाक़ की सनसनीखेज खबर अखबारों में छप गयी। दोनों के साथ दो परिवारों के लिए भी अचंभित करने वाली खबर के साथ साथ दुखद एवं अपमानजनक मामला हो गया। दोनों परिवारों ने मिलकर एक सहमति बनाने की कोशिश की लेकिन दामिनी ने साफ कर दिया कि मैं तलाकशुदा औरत हूँ अब मैंने निश्चय किया है कि जीवन भर मै अपने ही दमपर जीवन जीने की चेष्टा करूंगी। मैं ना तो रूढ़िवादी परंपरा में फसुंगी ना ही तलाकशुदा होने के डर से कोई समझौता करुंगी। 
पत्रकार एवं साहित्यकार शिलचर, असम
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