राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर।  नेशनल इपिलेप्सी डेराष्ट्रीय मिर्गी दिवस के अवसर पर आज गुरुवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) पुरकाजी पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें इसमें नोडल अधिकारी डॉ प्रशान्त कुमार, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ अरूण कर्णवाल एवं बीडीओ पुरकाजी के साथ मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ की टीम मौजूद रही।

नोडल अधिकारी डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (विकार) की वजह से व्यक्ति कई तरह की बीमारियों से पीड़ित हो सकता है। लेकिन इसे लेकर जागरूकता की कमी के चलते लोग इस समस्या से जूझ रहे लोगों से न सिर्फ दूरी बना लेते हैं, बल्कि उन्हें दिमागी तौर पर बीमाररी भी मान लेते हैं। न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से होने वाली गंभीर बीमारियों में से एक है मिर्गी। इसको लेकर भी लोगों के अंदरमें इसी तरह की धारणा बनी हुई है। ऐसे में लोगों को जागरूक करने के लिए आज पीएचसी पुरकाजी पर जागरुकता शिविर आयोजित किया गया। जिसमें लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरुक किया गया और इलाज के लिए प्रेरित किया गया। मिर्गी की बीमारी को इलाज के माध्यम से ठीक किया जा सकता है, इसको लेकर झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्करों में नहीं पड़ना चाहिए।
मनोचिकित्सक साइकियाट्रिस्ट डॉ अर्पण जैन ने बताया कि लगातार कमजोरी रहना, अंगों का टूटना, फड़फड़ाहट या झुनझुनी महसूस होना न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का एक गंभीर लक्षण हो सकता है। अगर आपके किसी को अंदर ऐसे लक्षण नजर आ रहे हैं तो यह एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस भी हो सकता है। यह तंत्रिका तंत्र की ऐसी बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान होने लगता है। इसकी वजह से मांसपेशिय़ों पर नियंत्रण धीरे-धीरे कम होने लगता है।  इसके अलावा एक्यूट न्यूरोपैथी के कारण भी शरीर के अंगों में अचानक कमजोरी भी हो सकती है। इसके साथ ही दिमाग की गतिविधि में रुकावट की वजह से दौरे पड़ना भी न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का एक अहम लक्षण है। बार-बार बेहोश होना और दौरे पड़ना मिर्गी के संकेत हो सकते हैं। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकती है।
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ अरूण कर्णवाल ने बताया कि शरीर के विभिन्न हिस्सों में होने वाले सामान्य दर्द कई बार भयावह बीमारियों की वजह से भी हो सकते हैं। सिर, गर्दन, पीठ, हाथ या पैर में होने वालाले यह दर्द मेनिनजाइटिस, ब्रेन हैमरेज, ब्रेन ट्यूमर या वेनस साइनस थ्रॉम्बोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं और इलाज को पूरा करवाएं।
साइकोथेरेपिस्ट मनोज कुमार ने बताया कि ब्लॉक पुरकाजी में समय-समय पर इस तरह के कैंप शिविर लगाए जाते रहते है जिनका उद्देश्य क्षेत्रवासियों को निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि मिर्गी की दिक्कत को इलाज के माध्यम से ठीक किया जा सकता है, झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्करों में पड़ना रोग की जटिलताओं को समय के साथ बढ़ाने का कारण हो सकता है। ऐसे में तुरंत रोगी को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल लेकर जाएं।