विद्यालयों में चरित्र निर्माण की शिक्षा जरूरी क्यों
दीपक कोहली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
आज विद्यालयों में आधुनिक तौर तरीकों से पढ़ाई हो रही है। 100 में से बच्चे 100 नंबर भी लेकर आ रहे हैं। इसके बावजूद भी हमारे बच्चे अपना चरित्र निर्माण नहीं कर पा रहे हैं। आज के बच्चे पढ़ाई को ही जीवन समझ लेते हैं, जबकि यह सरासर असत्य और झूठ है। हमारे जीवन में पढ़ाई के अलावा और भी चीजें महत्वपूर्ण है। एक बेहतर इंसान बनने के लिए हमें अपने चरित्र निर्माण की जरूरत होती है। 
पढ़ाई करने से मानवीय गुण नहीं आते हैं, बल्कि चरित्र निर्माण से मानवीय गुण आते हैं। हमारे बच्चे अंकों की दौड़ तक सीमित रह गए हैं। कला, नैतिक शिक्षा और सामाजिक सरोकार के बारे में उन्हें शून्य पता है। आम जीवन से जुड़ी बातों को लेकर विमर्श और विचार की अहमियत आज के बच्चों को ना विद्यालयों में समझ आती है, ना ही घर के आंगन में। आज बच्चे लगातार तनाव, अवसाद और आत्महत्या जैसी चीजों से जूझ रहे हैं। बच्चे मानसिक और भावनात्मक तौर पर बेहद कोमल और कमजोर होते हैं। इसलिए विद्यालयों में बच्चों को चरित्र निर्माण की शिक्षा देना आज की जरूरत है। कम उम्र में चिंता, अवसाद और क्रोध की ओर बढ़ना बच्चों के लिए बेहद घातक होता है। हम सभी को यह समझना होगा कि सामाजिक संबंधों की समझ और नैतिक मूल्यों के मार्गदर्शन से ही एक संतुलित परवरिश की संभावना है। आए दिन बच्चों की बर्बर घटनाओं और नकारात्मक सोच के विस्तार से हर घर में बच्चों को लेकर चिंता जताई जा रही है। आज अपराधिक घटनाओं को कम उम्र के बच्चे अंजाम दे रहे हैं। इन घटनाओं से यह पता चलता है कि हमारे बच्चों में चरित्र निर्माण की कमी है। अपने बच्चों में मानवीय गुणों की सीख और चरित्र निर्माण के जरिए हम एक बेहतर भविष्य बना सकते हैं। 
आप और हमें अपने बच्चों के चरित्र निर्माण के लिए लगातार कार्य करना होगा। एक बेहतर चरित्र ही हमारे बच्चे को अच्छा इंसान बनाएंगी। आइये हम सभी अपने बच्चों को एक बेहतर इंसान बनाने की कोशिश कर मानवीय सभ्यता के भविष्य को संवारते हैं।
अल्मोडा, उत्तराखण्ड़।