कथा व्यास मनोज जी महाराज ने गोपाष्टमी मनाने के कारण का वर्णन किया

गौरव सिंघल, देवबंद। शिक्षक नगर धर्मशाला में चल रही भागवत कथा में कथा व्यास मनोज जी महाराज ने गोपाष्टमी मनाने के कारण का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने जब छठे वर्ष की आयु में प्रवेश किया तब एक दिन भगवान माता यशोदा से बोले- मैय्या अब हम बड़े हो गए हैं। मैय्या यशोदा बोली- अच्छा लल्ला अब तुम बड़े हो गए हो तो बताओ अब क्या करें। भगवान ने कहा- अब हम बछड़े चराने नहीं जाएंगे, अब हम गाय चराएंगे। मैय्या ने कहा- ठीक है बाबा से पूछ लेना। मैय्या के इतना कहते ही झट से भगवान नंद बाबा से पूछने पहुंच गए। बाबा ने कहा- लाला अभी तुम बहुत छोटे हो अभी तुम बछड़े ही चराओ। भगवान ने कहा- बाबा अब मैं बछड़े नहीं गाय ही चराऊंगा। जब भगवान नहीं माने तब बाबा बोले- ठीक है लाला तुम पंडित जी को बुला लाओ- वह गौ चारण का मुहूर्त देख कर बता देंगे। बाबा की बात सुनकर भगवान झट से पंडित जी के पास पहुंचे और बोले- पंडित जी, आपको बाबा ने बुलाया है, गौ चारण का मुहूर्त देखना है, आप आज ही का मुहूर्त बता देना मैं आपको बहुत सारा माखन दूंगा। पंडित जी नंद बाबा के पास पहुंचे और बार-बार पंचांग देखकर गणना करने लगे तब नंद बाबा ने पूछा, पंडित जी क्या बात है ? आप बार-बार क्या गिन रहे हैं ? पंडित जी बोले, क्या बताए नंदबाबा जी केवल आज का ही मुहूर्त निकल रहा है, इसके बाद तो एक वर्ष तक कोई मुहूर्त नहीं है। पंडित जी की बात सुनकर नंदबाबा ने भगवान को गौ चारण की स्वीकृति दे दी और भगवान श्री कृष्ण गऊओ को चराने ले गये। मनोज जी महाराज ने कहा कि भगवान जो समय कोई कार्य करें वही शुभ-मुहूर्त बन जाता है। उसी दिन भगवान ने गौ चारण आरंभ किया और वह शुभ तिथि थी कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष अष्टमी, भगवान के गौ-चारण आरंभ करने के कारण यह तिथि गोपाष्टमी कहलाई। गोमाता में सभी देवी-देवता वास करते है। गोमाता की सेवा करने से सभी तीर्थों का फल मिलता है। इसलिये हम सबको गोमाता की सेवा करनी चाहिये। कथा श्रवण करने वालो में श्रीमती विनिता (बेबी), श्रीमती सुधा चौधरी, श्रीमति नेहा सिंधल, श्रीमति पूनम कौशिक, श्रीमति अर्चना, श्रीमति अरूणा, श्रीमति शुमलेश शर्मा, श्रीमति संयोगिता, शिवानी चौधरी, श्रीमती सुमन, श्रीमती सविता, श्रीमती नीलम, श्रीमती डोली गोयल, श्रीमति अन्नु , श्रीमती ममता वर्मा आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।