पिता

पियूष कैलाश आयुष गौड़, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

हम दो भाई नहीं,
पिता की भुजाओं मे बल हैं।
हममे बहता रक्त उनका है,
हम इसी से उत्कृष्ट प्रबल हैं।

पिता हमारे जीवन दाता हैं,
हम उनके हृदय का अंश हैं।
वो हमारे अम्बर हैं,
हम दो भाई उनकी चरण रज हैं।

पिता हमारे धन, चैन, नींद, सपनों के पंख हैं,
हम दो भाई उनकी शक्ति के प्रचंड शंख हैं।

पिता हमारी देह की सबल स्वरूप हैं।
हम दो भाई उनके अस्तित्व के प्रभाव से 
सदा प्रबल हैं।
जयपुर, राजस्थान