.....तो नीतीश कुमार हो सकते हैं नरेंद्र मोदी का बेहतर विकल्प

शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

नीतीश कुमार एक पढ़ें लिखे इंजीनियर व जेपी सेनानी हैं। उनके पिता कविराज रामलखन सिंह देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता सेनानी एवं एक वैध थे। नीतीश कुमार की छवि एक सामाजिक एवं साम्प्रदायिक सद्भाव बहाल करने वाले सभी जाति धर्म वर्ग एवं क्षेत्र के लोगों को एक साथ लेकर चलने वाले जातिवाद, वंशवाद एवं परिवारवाद से दूर इस देश के सबसे बड़े समाजवादी नेता एवं एक ईमानदार मुख्यमंत्री व राजनेता के रूप में है। 

नीतीश कुमार ने उस बिहार में कानून का राज कायम किया, जो बिहार कभी जातिय नरसंहार, साम्प्रदायिक तनाव, जातिय आधार पर बने निजी सेनाओं एवं हत्या, लूट, अपहरण, रंगदारी, फिरौती, बड़े-बड़े अपराधिक गिरोहों एवं महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार के कारण बदनाम था। नीतीश कुमार ने जहां अनूसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अतिपिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग एवं महिलाओं को निजी क्षेत्र के नौकरियों बिहार सरकार के अधीन आने वाले न्यायपालिका एवं स्थानीय निकाय तथा त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण दिया एवं इसके साथ ही पूरे देश में बिहार एकलौता ऐसा राज्य था, जहां सबसे पहले स्वर्ण आयोग का भी गठन किया गया एवं आर्थिक रूप से कमजोर ऊंची जाति के लोगो को भी सरकारी नौकरियों में आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की सिफारिश केन्द्र सरकार से किया, जिसके कारण जहां नीतीश कुमार एक सामाजिक न्याय के मसीहा के रूप में जाने जाते हैं।

नीतीश कुमार न्याय के साथ विकास का वादा करके और उस वादे पर खरा उतरकर तथा अपने पार्टी संगठन एवं सरकार में सभी वर्गों को समुचित प्रतिनिधित्व देकर जहां हर जाति वर्ग धर्म एवं क्षेत्र में लोकप्रिय एवं स्वीकार्य है, वही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबका साथ, सबका विकास एवं सबका विश्वास का नारा तो दिया, लेकिन अपने पार्टी संगठन एवं सरकार में पिछड़ा वर्ग, अतिपिछड़ा वर्ग, अनूसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अल्पसंख्यक समुदाय के लोगो को समुचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया, जिसके कारण ये सभी जाति, वर्ग एवं धर्म में समान रूप से स्वीकार्य नहीं है।

नीतीश कुमार के साथ जहां सभी राजनीतिक दल गठबंधन करने एवं साथ चलने को तैयार एवं उत्सुक रहते हैं, वही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ गठबंधन के साथी दल भी हमेशा सशंकित रहते हैं तथा सर्व धर्म समभाव की सर्वोपरी माननेवाले धर्मनिरपेक्ष राजनीति करने वाले कोई भी राजनीतिक दल इनके साथ ना ही गठबंधन कर सकता हैं और ना ही इनके साथ चल सकता हैं। नीतीश कुमार ना किसी को फंसाते है और ना ही किसी को बचाते हैं, वही नरेन्द्र मोदी की छवि अपने लोगों को बचाने एवं विरोधियों को तंग तबाह करने तथा फंसाने की बन गई है।

नीतीश कुमार केवल सरकार ही नही चलाते, बल्कि सरकार के माध्यम से शराबबंदी, प्रर्यावरण संरक्षण हेतु जल जीवन हरियाली, कन्या भ्रूण हत्या रोकने, बाल विवाह रोकने, दहेज प्रथा समाप्त करने जैसे महत्वपूर्ण विभिन्न समाजिक सुधार एवं समाजिक सरोकार से जुड़े कानून को लागू करने के साथ साथ जन जागरूकता कार्यक्रम अभियान चलाया। नीतीश कुमार ने वैसे राज्य को विकसित राज्य बनाया, जिसको कभी बीमारू राज्य कहां जाता था। नीतीश कुमार ने दूरगामी सोच के तहत अपने राज्य मे हर घर नल का जल, साईकिल एवं पोशाक योजना,हर घर बिजली, जेपी सेनानी सम्मान पेंशन योजना, सरकारी नौकरियों एवं त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण, सभी विकलांगों विधवाओं एवं बुजुर्गों को समाजिक पेंशन योजना देने, डिजिटल पेमेंट की सुविधा, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई हेतु विशेष आर्थिक अपराध इकाई एवं विशेष स्पेशल न्यालय का गठन, आपदा प्रबंधन एवं साहयता सहित अनेकों जनकल्याणकारी योजनाएं एवं कानून लागू किये, जिसकी प्रशंसा विदेशों तक हुईं तथा इसकी अनुसरण कई राज्य सरकारों एवं केन्द्र सरकार ने भी किया।

नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सात निश्चय योजना, कानून का राज, न्याय के साथ विकास, समाजिक एवं साम्प्रदायिक सद्भाव, बेरोजगारों को रोजगार देने का जो वादा किया था, उस पर पूरी मुस्तैदी के साथ आज भी अडिग है और इन योजनाओं को लागू करने के साथ साथ इन योजनाओं पर निरंतर कार्य कर रहे, वहीं नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान आमजनों से विदेशों से काला धन वापस लाने, हर साल दो करोड़ नौजवानों को नौकरी रोजगार देने, महंगाई दूर करने, किसानों की आमदनी दुगुनी करने, प्रत्येक व्यक्ति के खाते में पन्द्रह लाख रूपया डालने, डीजल पेट्रोल रसोई गैस सिलेंडर सस्ता करने इत्यादि का जो वादा किया, उसका पालन करने की बात तो दूर है, अब उसकी चर्चा भी नहीं करते हैं।

नीतीश कुमार जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम चलाकर एवं बार-बार विभिन्न यात्राओं के माध्यम से राज्य भर का दौरा करके आमलोगों की की मन की बात एवं समस्या सुनकर उसपर त्वरित कार्रवाई करने के साथ साथ बराबर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए पत्रकारों के द्वारा पुछे जाने वाले विभिन्न सवालों का तथ्यपरक सही व माकूल जवाब देते हैं। नीतीश कुमार अपने वोट की चिंता नहीं, बल्कि सभी वोटरों की चिंता करते हुए केवल आमजनों की हित में काम करने पर विश्वास करते हैं। नीतीश कुमार हमेशा सर्व धर्म समभाव को सर्वोपरी मानते हुए समाजिक एवं साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के साथ साथ सुशासन के संकल्प के साथ न्याय के साथ विकास के आधार पर समाजवादी विचारधारा की राजनीति करते हैं। नीतीश कुमार ने अपने आप को कभी भी कुर्मी या पिछड़ा वर्ग का बेटा होने के नाम पर वोट नहीं मांगा।

नीतीश कुमार ने अपने 37 वर्षों के संसदीय जीवन में कभी भी किसी व्यक्ति, दल या समाजिक संगठनों के ऊपर व्यक्तिगत टिका-टिप्पणी या असंसदीय भाषा का प्रयोग नहीं किया और ना ही उनके उपर आज तक किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार घपला घोटाला या पद के दुरूपयोग करने का आरोप लगा है। नीतीश कुमार अपने सहयोगी दलों को अपनी सरकार में भरपूर एवं समुचित हिस्सेदारी तथा मान सम्मान देते हैं। नीतीश कुमार की सबसे बड़ी एवं ऐतिहासिक उपलब्धि यह है कि बिहार में संसदीय राजनीति करने वाले सभी दलों ने बारी-बारी से उनके नेतृत्व में कार्य किया है एवं बिहार में इतने लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाया है, यही नहीं देश के इतिहास में नीतीश एक ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने विभिन्न समयों में विभिन्न दलों के साथ लगातार सबसे लंबे समय तक गठबंधन सरकार का नेतृत्व करने का भी रिकॉर्ड बनाया है, जबकि नरेन्द्र मोदी को यह उपलब्धि हासिल नहीं है। नीतीश कुमार ने जहां बिहार में विश्व स्तरीय संग्रहालय, बहुउद्देशीय विधानसभा भवन, आकर्षक एवं भव्य सभ्यता द्वार का निर्माण करके बिहारवासियों का सिर गर्व से ऊंचा किया है, वही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली के लालकिला जैसी महत्वपूर्ण धरोहर एवं ऐतिहासिक स्थल की देखरेख करने में असमर्थ होकर उसको भी नीजी कंपनी के हाथों में सौंप दिया।

इन्हीं सब कारणों से जैसे ही नीतीश कुमार का नाम जब से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में सामने आया है, तब से 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी हार सुनिश्चित देखकर भाजपाई खेमे में बैचेनी बढ़ गई है। राजनीति के पंडित बताते हैं कि नीतीश का एकमात्र लक्ष्य भाजपा को केन्द्र सरकार के सत्ता से हटाना है और यदि मौका मिला तो देश के सबसे बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे। जानकार बताते हैं कि नीतीश कुमार नरेन्द्र मोदी से बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।

भारत सहयोग संघ जमशेदपुर, बिहार