पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती धूमधाम से मनाई
शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी चंद्र भूषण सिंह के निर्देशानुसार खंड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र ज्योति प्रकाश तिवारी के नेतृत्व में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आज़ादी का अमृत महोत्सव एवम चौरी-चौरा शताब्दी वर्ष की श्रृंखला में भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती धूमधाम से मनाई गई।
इस अवसर पर विद्यालयों में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा, छायाचित्र पर पुष्पांजलि व माल्यार्पण किया गया। शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं को पंडित गोविंद बल्लभ पंत के योगदान, व्यक्तित्व और कृतित्व से अवगत कराया। शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं को उनके भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान और देश के विकास में उनकी भूमिका के विषय मे भी बताया। शिक्षकों ने बताया कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत समाज के प्रति संवेदनशील थे। उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया कि  उनका नाटक  अंगूर की बेटी समाज मे मद्यपान के विपरीत प्रभाव को दिखाता है । ’वरमाला ’ और ’राज मुकुट’ ’उनके बेहद प्रसिद्ध नाटक हैं। शासन के निर्देशानुसार यूट्यूब  प्रसारण  नचहवअ विपबपंस  पर भी बच्चों को जोड़ा गया ।
खंड शिक्षा अधिकारी ने पन्त जीपंडित गोविंद बल्लभ पंत के सत्यकृत्यो को स्मरण करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत में उ0प्र0 के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में पं0 गोविन्द वल्लभ पन्त ने जमीदारी विनाश अधिनियम 1951 लागू किया। इस एतिहासिक कार्य से देश को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभायी। उन्होने कहा कि पन्त जी का स्वतंत्रता आन्दोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होने असहयोग आन्दोलन, साइमन कमीशन के बहिष्कार एवं नमक सत्याग्रह में बढ.चढ कर हिस्सा लिया था।
     उन्होने कहा कि पन्त जी महान देशभक्त, कुशल प्रशासक, सफल वक्ता तथा लेखनी से सशक्त थे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के बाद उन्होने देश के गृहमंत्री के पद का भी निर्वहन किया। उनकी महान देशभक्ति तथा कुशल सेवा के कारण 1957 में भारत सरकार ने सर्वोच्च उपाधि भारत रत्न से विभूषित किया। इस अवसर पर सभागार में उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित किया।