ऐ शराब! तू ना गई मेरे मन से

नादिर राणा,शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। 

जीवन में हम बहुत सी अच्छाई और बुराई के साथ जीते हैं, जीवन का यह चक्र चलता रहता है.... कुछ शौक ऐसे भी होते हैं जो फिर बाद में धीरे धीरे ऐब बनते चले जाते हैं लेकिन इंसान मानने को तैयार नहीं होता कि उसका शौक कितना बड़ा ऐब और बुराई बन चुका है, बहुत सी ऐसी बुराईयां हैं जिन पर बात की जा सकती है लेकिन इनमें एक बहुत बड़ी बुराई और ऐब शराब है.... जो एक साथ सैकड़ों बुराईयां पैदा करती है, आप शराब का सेवन चोरी छुपे खूब करते हैं तथा आपको लगता है कि कोई नहीं देख रहा है.... आपका ऐसा सोचना गलत होता है, ऐब कोई भी हो सात परतों में भी नहीं छुपता एक दिन सामने आ ही जाता है, आपकी अति खुद उसको सामने ला देती है, यह एक ऐसा ऐब और बुराई है जब चढ़ जाता है तो सभी रिश्ते और मर्यादा भूल जाता है, आप सभी को समझा सकते हो लेकिन शराबी को नहीं.... जब नशे का खुमार उतरता है तो बहुत कुछ नुक्सान कर चुका होता है!! मेरा एक कडुआ अनुभव रहा है मैंने जब कभी शराब को लेकर रिश्तों और दोस्तों में तल्ख़ी दिखाई तो दोनों ने ही दूरियाँ बनाना उचित समझा या फिर मेरी तरफ से मुंह मोड़ लिया, जो इस बुराई का समाधान बिल्कुल नहीं है, मुझे शराब से बहुत नफ़रत है लेकिन शराबियों से नहीं..... बहुत शिद्दत और करीब से इसके नुक्सान और घातक परिणाम देखें हैं लेकिन आज भी आप इस बुराई.... शौक.... को अपनी पारिवारिक, सामाजिक, मित्र मंडली से खत्म नहीं कर सकते!! विषय बहुत विस्तृत है फिर भी इतना ही अनुरोध है कि इस शौक को चोरी छुपे करने वाले एक दिन इसके इतने आदी हो जाती हैं कि फिर तमाशा सरेआम होता है, रुसवाई होती है जगहंसाई होती है.... बेहतर हो कि समय रहते इससे दूरी बना ली जाए अन्यथा जिंदगी तो एक दिन दूरी बना ही लेती सदा के लिए!!

मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश