मगर फ़िर भी
प्रज्ञा पांडेय "मनु", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। टूटी हुई कश्ती में हम तो सफर करते है, बड़ी हिम्मत है मगर फ़िर भी कभी डरते हैl जीने भी देते नही चैन से वो मुझको, मेरे मरने में भी वो पूरी दखल रखते हैंl प्यार का इजहार तो करते नहीं है हमसे, मेरे ना आने पे वो मेरी फिकर करते हैंl वादा तो फूलों का किया था मुझसे, हांथ में मेरे वो, शरर रखते हैl किस किस ने मुझे रुसवा किया है यारों, हम इस बात की पूरी ख़बर रखते हैl झेल जाते है हर वार को सीने पर , हम भी क्या खूब जिगर रखते हैंl वापी, गुजरात