न जाने क्यों


राजीव डोगरा 'विमल', शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।


न जाने क्यों
खो सा गया है कही
मेरा मन।


न जाने क्यों
मिट्टी सा हो गया है
मेरा तन।


न जाने क्यों
टूट गया है,
उनकी याद में
ह्रदय का हर एक कण।


न जाने क्यों
बिखर गए है,
हर ख्वाब मेरे
फिक्र में उनकी हरदम।


युवा कवि लेखक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश