एसडी कालेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एण्ड टैक्नोलोजी में जल शोधन हेतु शोध प्रोजेक्ट पर कार्य करने हेतु पाँच लाख का अनुदान स्वीकृत


शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। एसडी कालेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एण्ड टैक्नोलोजी में जल शोधन हेतु डा0 एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय लखनऊ द्वारा शोध प्रोजेक्ट पर कार्य करने हेतु पाँच लाख का अनुदान स्वीकृत किया गया है। जल शोधन शोध प्रस्ताव बायोटैक्नोलोजी विभाग के अध्यक्ष डा0 नवीन द्विवेदी ने प्रस्तावित किया है। जैसा कि जल जीवन के लिये बहुत ही आवश्यक है। आज के परिवेश में शुद्ध जल मानव क्या प्राणी मात्र के लिये एक बड़ी चुनौती है। पीने के पानी को शुद्ध करने के लिये तमाम तरह की तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इसी क्रम में जनपद की अग्रणी संस्था एसडी कालेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टैक्नोलोजी का बायोटैक्नोलोजी विभाग इस पर लगातार कार्य कर रहा है। संस्थान के बायोटेक विभाग द्वारा जल के शोधन पर आधुनिक तकनीकों पर कार्य किया जाता है। विभाग ने अपना शोध प्रस्ताव प्रदेश के तकनीकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू लखनऊ) की रिसर्च सेल (विश्वैश्रैया रिसर्च प्रोमोशन स्कीम) को भेजा गया था, जिसे विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ समिति द्वारा स्वीकार कर लिया गया है एवं प्रोजेक्ट के लिये धनराशि अनुदानित की है। 
प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर डा0 नवीन द्विवेदी ने बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार के बाद अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पानी में फ्लोराइड व आर्सेनिक जैसे जहरीले रसायनों की मात्रा तेजी से बढ़ती जा रही है। जिसके कारण हड्डियों की समस्या (स्कैलेटल फ्लोरोसिस), दाँतों की समस्या (डैन्टल फ्लोरोसिस) व त्वाचा रोग एवं कैंसर जैसी घातक जानलेवा बीमारीयाँ हो रही है। एनजीटी द्वारा पिछले दिनों मेरठ, बागपत सहित अन्य जिलों में भूजल की जाँच कराई गयी तो पानी में फ्लोराइड व आर्सेनिक का स्तर बढ़ा मिला। डा0 द्विवेदी ने बताया कि वह अपने इस प्रोजेक्ट में नैनोटैक्नोलोजी के द्वारा बायोहाइब्रिड मेटिरियल विकसित करेंगे जो विषाक्त पानी का पूर्णतः शुद्ध कर देगा व इस विधि के इस्तेमाल से प्रकृति को भी किसी तरह की क्षति नही पहुँचेगी। 
संस्थान के अधिशासी निदेशक प्रो0 (डा0) एसएन चौहान ने कहा संस्थान का बायोटेक विभाग प्रदेश में इकलौता विभाग है, जिसे प्रोजेक्ट फंडिंग के लिये चुना गया। इसमें लगभग 60 कालेजों के विभिन्न संकायों के प्राजेक्टस को स्क्रीन किया गया था और 24 को फंडिंग के लिये चयनित किया गया जिसमें संस्थान के बायोटैक्नोलोजी विभाग को चुना गया।   
इस अवसर पर संस्थान के प्राचार्य डा0 एके गौतम ने कहा कि जल एक नव्यकरणीय संसाधन है, लेकिन सीमित है। विश्व में जल ही केवल एक ऐसा रासायनिक द्रव्य है जो तीन रूपों में पाया जाता है, लेकिन मानव के अनुचित उपयोग ने इस अमूल्य संसाधन पर संकट खड़ा कर दिया है। डा0 गौतम ने कहा कि इस तरह की नई तकनीकों को अपनाकर संस्थान के शिक्षक व छात्रों को रिसर्च के क्षेत्र में नये अवसर प्राप्त होंगे।