अवार्ड से मिली धनराशि से सुदृढ़ की जाएंगी स्वास्थ्य सेवाएं


शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर।  शासन द्वारा वर्ष 2019 के कायाकल्प अवार्ड के लिए पहले स्थान पर चुने गये जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) ने कहा कि अवार्ड से मिली धनराशि से स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ की जाएंगी। सीएमएस अवार्ड मिलने का पूरा श्रेय सभी चिकित्सक, फार्मासिस्ट व स्वास्थ्यकर्मियों को देती हैं।  



सरकार प्रतिवर्ष स्वास्थ्य सेवाओं का सर्वे कराती है। प्रदेश स्तरीय टीम स्थानीय सत्यापन के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत करती है। इसके बाद प्रदेश स्तर पर अस्पतालों का चयन किया जाता है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. अमृता रानी भांभे ने बताया जिला महिला अस्पताल को विशेष रूप से बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण, परिसर में विशेष रूप से स्वच्छता,उपकरणों का रख-रखाव, रिका‌र्ड्स को बेहतर ढंग से रखा जाना, स्वच्छ जल, इमरजेंसी में तत्काल बेहतर उपचार आदि के कारण कायाकल्प अवार्ड मिला है।

सीएमएस डा. भांभे ने बताया 2016-17 में 8वां नंबर, 2017-18 में 5वां नंबर, 2018-19 में चौथा नंबर, 2019-20 में कायाकल्प के तहत जिला महिला अस्पताल पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर आया है। 2016 से लेकर अब तक लगातार अस्पताल के चिकित्सकों समेत पूरा स्टाफ मरीजों की सेवा और निरंतर जनहित कार्यों में लगा हुआ है।  उन्होंने कहा कि वह अपने स्टाफ के साथ आगे भी इसी प्रयास के साथ निरंतर कार्य करती रहेंगी।

अस्पताल की मैनेजर प्रियंका तोमर ने बताया कि तीन दिनों तक टीम ने जिला व महिला अस्पताल में साफ-सफाई, मरीजों को मिलने वाली सेवाओं  अभिलेखों के रख-रखाव के अलावा चिकित्सकों द्वारा मरीजों के साथ व्यवहार की पड़ताल की थी। टीम ने अपनी रिपोर्ट शासन को दी। शासन स्तर से अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर हुए सर्वे में रैंक तैयार की गई, जिसमें मुजफ्फरनगर के जिला महिला अस्पताल ने 96.3 स्कोर के साथ 2019 कायाकल्प अवार्ड योजना में पहला स्थान हासिल किया। रैंक के आधार पर अस्पताल को 30 लाख रूपये की राशि दी जाएगी। इस राशि से अस्पताल में मरीजों के उपचार के लिये अत्याधुनिक उपकरणों को खरीदा जाएगा। रैंक उसी स्थान पर बनी रहे इसके लिये प्रयास लगातार जारी रहेंगे। 

 प्रदेश में पहली रैंक मिलना गर्व की बात 

 

  मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. प्रवीण चोपडा का कहना है कायाकल्प योजना के तहत उप्र में 71 जिलों में पहली रैंक मिलना गर्व की बात है, जबकि यूपी में चिकित्सा सुविधा के मामले में बड़े शहरों में बेहतर सुविधाएं हैं। यह चिकित्सकों व कर्मचारियों द्वारा मरीजों की सेवा करने का फल है।--