जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान का नारा बुलंद करने वालों को चाहिए किसान को भी बराबर का सम्मान दें 


आशीष Kr. उमराव "पटेल", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।


जैसे जवान सीमा पर ठण्ड, गर्मी व बरसात में डंटा रहता है, इसी तरह किसान ठण्ड, गर्मी और बरसात में खेत पर डंटा रहता है। अगर जवान सीमा छोड़ दे तो देश बर्बाद हो जायेगा। इसी तरह किसान खेत छोड़ दे तो देश बर्बाद हो जायेगा। किसान, जवान व विज्ञान तीनों का योगदान एक जैसा है, इसलिए कहा गया है जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान। जब तीनों का योगदान एक जैसा है, तो तीनों को सम्मान एक जैसा मिलना चाहिए।


जवान व वैज्ञानिकों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन के साथ सारी दूसरी सुविधाएँ मिलती हैँ। किसान को क्या मिलता है?  इसलिए किसान के लिए तुरंत तीन गारंटी तुरंत लागू होनी चाहिए। पहली समय पर खेत में ही फसल खरीद की गारंटी सीधे सरकार फसल खरीदे, जो भी किसान बोये, दूसरा समय पर उचित मूल्य की गारंटी तीसरा समय पर उचित आपदा मुवावजे की गारंटी, ये तीन गारंटी तो तुरंत मिलनी चाहिए। अगर हम तीनों के योगदान का सम्मान करते हैँ तो तीनों का सम्मान एक जैसा होना चाहिए। जो बार्डर पर डंटा है, जो खेत पर डंटा है या जो अपनी प्रयोगशाला में डंटा है, तीनों का योगदान एक जैसा है। तीनों अपने योगदान से हिंदुस्तान को खुशहाली की तरफ ले जा रहे हैँ, लेकिन किसान की उसके योगदान का सम्मान नहीं मिल रहा है। इसलिए पहले किसान है, फिर जवान फिर विज्ञान इन तीनों के सम्मान के लिए पहले किसान को तो मजबूत करना पड़ेगा, इसलिए किसान को भी पेंशन मिलनी चाहिए। वृद्धावस्था में जैसे जवान को या वैज्ञानिकों को पेंशन मिलती है, ऐसे तो पेंशन किसान को भी मिलनी चाहिए, कम से कम तीन चीजों को गारंटी तो तुरंत मिलनी चाहिए। तब होगा जय किसान, जय जवान, जय विज्ञान का नारा बुलंद। तीनों का योगदान एक सामान तो क्यों हो रहा भेदभाव किसान के साथ।


डायरेक्टर गुरु द्रोणाचार्य आईआईटी-जेईई, नीट & डिफेन्स (NDA & CDS) अकादमी, फाउंडर-डॉक्टर्स अकादमी अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा सहारनपुर मंडल