वीरांगना रानी शिरोमनी

कुंवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

महान क्रांतिकारी रानी शिरोमनी का जन्म मिदनापुर (बंगाल) के कुड़मगढ़ स्थित कुर्मबेढ़ा दुर्ग में एक जमींदार के घर में हुआ था। वे नयावसन के खेलार राजपरिवार की बेटी थीं। इनके पिता और परिवार का गौरवमयी इतिहास और स्वर्णिम ऐश्वर्यपूर्ण प्रासाद थे। शिरोमनी बहुत ही आकर्षक व्यक्तित्व की धनी, रूपवान और बहुत ही साहसिक, निर्भीक नवयौवना थी। शादी योग्य होने पर उनका विवाह कर्मगढ़ के राजकुमार अजीत प्रासाद से हुआ। रानी शिरोमनी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पहली ऐसी वीरांगना हैं, जिन्होंने मातृभूमि देश को दासता की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए हँसते-हँसते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी और सर्वस्य न्यौछावर कर दिया।

कुड़मी वीरांगना के भव्य राजमहल के भग्नावेश इनकी वीरता, शौर्य ऐश्वर्य और बहादुरी के किस्से स्वयं बयां करते हैं। ट्राइब एण्ड कॉस्ट ऑफ बंगाल के लेखक एचएच रिज़ले, रानी संग्राम पृथ्वीराजसेन रानी शिरोमनी के लेखक पुलक बन्दोपाध्याय, द चुआर रिबेलियन के लेखक जेसी प्रॉइस, कुडुक के अनुगूँज के लेखक फ्रान्सिस कुजूर आदि तमाम विद्वानों ने महान वीरांगना रानी शिरोमनी के साहस, शौर्य और बलिदान का विस्तृत वर्णन अपनी अपनी पुस्तकों में दर्ज किया है। गौरवशाली कुड़मी/ कुरमी महारानी शिरोमनी को हृदय से नमन......

 

राष्ट्रीय अध्यक्ष जय शिवा पटेल संघ