नीव का पत्थर बने डाकघर के कोरोना योद्धा मेल ओवरसियर

शि.वा.ब्यूरो, खतौली। यूं तो पुलिस, डाक्टर, सफाई कर्मचारियों व पत्रकारों को कोविड़ 19 के कारण देशव्यापी लाॅकडाउन में उनकी बेहतरीन सेवा के लिए कोरोना योद्धा के रूप में विभिन्न संस्थाओं द्वारा विभिन्न स्थानों पर विभिन्न तरीकों से सम्मानित करने की स्वस्थ परम्परा डालने का प्रयास किया गया है, लेकिन इन सबके बीच एक कर्मचारी वर्ग ऐसा भी है, जो इस सम्मान का अधिकारी होते हुए इस सम्मान से वंचित है।

जी हां! सम्मान का अधिकारी होते हुए भी सम्मान से वंचित रहना वाला यह कर्मचारी हैं, उपमण्ड़लीय डाकनिरीक्षक के कार्यालय में नियुक्त मेल ओवरसियर। मेल ओवरसियर लाॅकडाउन के बीच लोगों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने का सबसे बड़ा जरिया बन रहे हैं। 


बता दें कि कोविड़ 19 के तहत रेड़ जोन में आने के कारण कई जगहों पर बैंकों की सेवाएं बाधित हैं, ऐसे में लोगों की आर्थिक जरूरत को पूरा करने के लिए पोस्ट पैमेंट बैंक के जरिए डाकघर सामने आया है। पोस्ट पैमेंट बैंक के जरिये ऐसा कोई भी व्यस्क जिसका बैंक खाता आधार से लिंक है, डाकघर की किसी भी शाखा में जाकर केवल अंगूठा लगाकर दस हजार तक ही धनराशि प्राप्त कर सकता है। इसी योजना के तहत ग्रामीण गांव में स्थित शाखा डाकघरों में जाकर शाखा डाकपालों से पोस्ट पैमेंट बैंक के माध्यम से धन प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन प्रायः शाखा डाकघरों में नकदी का अभाव रहता है और यहां उप मण्ड़लीय डाक निरीक्षक के कार्यालय में मौजूद मेल ओवरवियर सतीश कुमार व सुन्दर लाल इसी अभाव को पूरा करने का काम कर रहे हैं। कोरोना महामारी के बीच लोगों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे ये दोना मेल ओवरसियर मात्र नीव का पत्थर बन कर रह गये हैं, जबकि वे कोरोना योद्धा के ताज से नवाजे जाने के प्रबल हकदार हैं।