परिषद के गठन से पहले नियुक्ति वाले शिक्षकों को मिले नकदीकरण (शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र के वर्ष 12, अंक संख्या-29, 14 फरवरी 2016 में प्रकाशित लेख का पुनः प्रकाशन)


शि.वा.ब्यूरो, इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने एक निर्णय में कहा है कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के गठन के पूर्व नियुक्ति पाने वाले शिक्षक व कर्मचारी अवकाश नकदीकरण के हकदार हैं क्योंकि बेसिक शिक्षा अधिनियम 1972 की धारा नौ इस संबंध में ऐसा कोई प्रावधान नहीं करती जिससे स्थानीय निकायों से स्थानांतरित कर्मचारियों के अवकाश नकदीकरण पर किसी प्रकार का प्रतिबंध लगता हो।
यह निर्णय मुख्य न्यायमूर्ति डा.डीवाई चंद्रचूड एवं न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने बेसिक शिक्षा परिषद की विशेष अपील को खारिज करते हुए दिया है। मामले के तथ्यों के अनुसार हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मिर्जापुर निवासी धरणीधर दुबे की याचिका पर सुनवाई के बाद याची को अवकाश नकदीकरण देने का आदेश दिया था। बेसिक शिक्षा परिषद ने एकल पीठ के इस आदेश की वैधानिकता को विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी।
मामले के तथ्यों के अनुसार धरणीधर दुबे ने 13 जुलाई 1965 को मिर्जापुर शहरी क्षेत्र में नियुक्ति पाई। बाद में बेसिक शिक्षा परिषद का गठन हुआ तो उन्हें परिषद में स्थानांतरित कर दिया गया। अवकाश प्राप्त करने के बाद धरणीधर दुबे को अवकाश नकदीकरण देने से इनकार कर दिया गया। कहा गया कि पूर्व में नियोजित कर्मचारियों की सेवा शर्तों में अवकाश नकदीकरण का प्रावधान नहीं है। इसपर धरणीधर ने याचिका दाखिल की तो कोर्ट ने याची को अवकाश नकदीकरण दिए जाने का आदेश दिया था।