पहली बार गुजरात गठन के लिए हुआ था जनता कर्फ्यू का प्रयोग


हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।


 हालांकि भारत के इतिहास में लाॅकडाउन का कोई उदाहरण नहीं मिलता है, लेकिन विश्व का पहला लाॅकडाउन अमेरिका में 9 सितम्बर 2001 (9/11) को ट्रेड़ सेंटर पर हुए हमले के बाद किये लाॅकडाउन को माना जाता है। इसके बाद 2013 में बोस्टन और 2015 में बु्रसेल्स में लाॅकडाउन के उदाहरण मिलते हैं। लाॅकडाउन का सीधा सा मतलब है कि घर से निकलने की अनुमति नहीं। कुछ लोग लाॅकडाउन की तुलना कर्फ्यू से भी कर रहे हैं, लेकिन कर्फ्यू और लाॅकडाउन में अन्तर करने से पहले कर्फ्यू शब्द की उत्पत्ति और इसके मायने को जानना जरूरी है। थोड़ा गहराई में जाते हैं तो ज्ञात होता है कि कर्फ्यू शब्द फ्रेंच भाषा के पुराने फ्रेज  couvre & feu से आया है। इसका मतलब होता है आग को ढकना। इंग्लिश में इसे curfeu कहा जाता है, जो आधुनिक अंग्रेजी में curfew हो गया है। इतिहासकारों के अनुसार 1066 से 1087 तक इंग्लैंड का राजा विलियम द कांकरर था। उसके दौर में एक कानून बनाया गया था, जिसे curfeu के नाम से पुकारा जाता था। उन दिनों अकसर लकड़ी के बने मकानों में भयंकर आग लग जाती थी, जिसे रोकने के लिए वह कानून बनाया गया था। उस कानून के मुताबिक 8 बजे की घंटी बजने के बाद सभी रोशनी और आग को बुझा देना पड़ता था, ताकि कहीं भी आग न लग सके। कहा तो ये भी जाता है कि कर्फ्यू का प्रारंभ इग्लैंड में विलियम द कांकरर द्वारा राजनीतिक दमन के लिए किया गया था।
पुलिस द्वारा घोषित एक आज्ञा होती है कफ्र्यू 
वर्तमान में कर्फ्यू का मतलब ही बदल गया है। यह पुलिस द्वारा घोषित एक आदेश या आज्ञा होती है, जिसका उपयोग विशेष परिस्थितियों में, उदाहरणतः दंगा, लूटपाट, आगजनी, हिंसात्मक तथा विध्वंसक कार्यों को रोककर पुनः शांति एवं व्यवस्था स्थापित करने तथा नागरिकों की सुरक्षा के निमित्त किया जाता है। आज के कर्फ्यू आदेश के साथ विधि का बल है और इसका उल्लंघन दंडनीय है। भारत में यह आदेश दंडविधान संहिता की धारा 144 के अंतर्गत कार्यकारी मैजिस्ट्रेट द्वारा दिया जाता है। आज कर्फ्यू तब लगता है, जब हालात नियंत्रण में ना हों। जब भी कोई दंगा या ऐसे हालात होते हैं तो सबसे पहले क्षेत्र में धारा 144 लागू की जाती है। उसके बाद भी यदि हालात नियंत्रण में ना आएं तो कर्फ्यू लगाया जाता है। इसमें सरकार जनता पर कुछ पाबंदियां लगा देती है। जिनका सख्ती से पालन करना जरूरी होता है। यद्यपि उसके मूल में सुरक्षा की भावना यथावत है।
जनता कर्फ्यू मतलब खुद पर लगाया गया एक प्रतिबंध
22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोविड़ 19 के खतरों से आगाह करते हुए पहले जनता कर्फ्यू और फिर बाद में लाॅकडाउन घोषित कर दिया था। जानकार जनता कर्फ्यू और लाॅकडाउन में बुनियादी फर्क बताते हुए कहते हैं कि जनता कर्फ्यू अंग्रेजी लॉकडाउन से भिन्न है। जनता कर्फ्यू व्यक्ति पर अनिवार्य नहीं होता। ये कर्फ्यू जनता का खुद पर लगाया गया एक प्रतिबंध होता है, जबकि लॉकडाउन शासन द्वारा जनता पर आरोपित किया जाता है तथा जनता द्वारा इसका पालन करना अनिवार्य होता है। 
गुजराती इंदुलाल याग्निक हैं भारत में जनता कर्फ्यू के जनक
भारतीय इतिहास पर नजर डालें तो 1950 के दशक में गुजरात राज्य के निर्माण के अहम सूत्रधार इंदुलाल याग्निक ने जनता कर्फ्यू का पहली बार महागुजरात आंदोलन के दौरान उस सयम इस्तेमाल किया था, जब बाॅम्बे के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने आंदोलन को सख्ती से दबाने की कोशिश की थी और उन्होंने छात्रों पर गोली तक चलवा दी थी, जिसमें कई छात्रों की मौत हो गयी थी। लोगों का ध्यान भटनकाने के लिए मोरारजी देसाई ने अहमदाबाद के लाल दरवाजा पर उपवास पर बैठने का ऐलान किया। उनके इस ऐलान के बाद हिंसा बढ़ने की आशंका जताई जाने लगी और इसी की काट के लिए इंदुलाल याग्निक ने जनता कर्फ्यू का ऐलान किया। उन्होंने अहमदाबाद के लोगों से उपवास वाले दिन घर पर ही रहने को कहा ताकि पुलिस से किसी भी तरह का टकराव टाला जा सके। ये जनता कर्फ्यू बेहद सफल रहा और लोग अपने घरों के अंदर ही रहे। मोरारजी को अपने उपवास को खत्म करना पड़ा था। जनता कर्फ्यू की बदौलत इंदुलाल याग्निक ने केंद्र और बॉम्बे सरकार को घुटने पर मजबूर कर दिया था और 1 मई 1960 को गुजरात अस्तित्व में आ पाया था। इसके विपरीत लॉकडाउन एक तरह की आपातकाल व्यवस्था होती है। अगर किसी क्षेत्र में लॉकडाउन हो जाता है तो उस क्षेत्र के लोगों को घरों से निकलने की अनुमति नहीं होती है। जीवन के लिए आवश्यक चीजों के लिए ही बाहर निकलने की अनुमति होती है। अगर किसी को दवा या अनाज की जरूरत है तो बाहर जा सकता है या फिर अस्पताल और बैंक के काम के लिए अनुमति मिल सकती है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल के काम से भी बाहर निकलने की अनुमति मिल सकती है। 
क्वारंटाइन मतलब आईसोलेशन का 40 दिन का समय
देश में लाॅकडाउन के बाद से क्वारंटाइन शब्द का बहुतायत प्रयोग हो रहा है, जबकि इससे पहले शायद ही किसी ने इस शब्द का प्रयोग किया हो। बता दें कि क्वारंटाइन का प्रयोग 14वीं शताब्दी में समुद्र के किनारे बसे शहरों में महामारी से बचाव के लिए किया जाता था। उस समय वेनिस आदि आने वाले पानी के जहाज में सफर करने वाले लोग प्रायः येलो फीवर व हैजा जैसी विभिन्न बीमारियों से संक्रमित हो जाते थे। इस संक्रमण से बचाव के लिए आने वाले लोगों को 40 दिनों के लिए अलग रोक लिया जाता था, जिसे क्वारंटाइन कहा गया। क्वारंटाइन इटेलिक शब्द है, जिसका मतलब है, आईसोलेशन का 40 दिन का समय।
लेकिन आज के जैसा लाॅकडाउन नहीं देखा
कोविड़ 19 के कारण भारत में पहली बार लगे लाॅकडाउन के बारे में लगभग 95 वर्षीय की मुन्नी देवी बताती हैं कि पहले के दिनों में युद्ध के समय लोग घरों की लाइट बंद कर लेते थे। इसी तरह प्रथम विश्व युद्ध के वक्त लोग सायरन बजा कर संकेत देते थे कि वो घरों में चले जाएं और सभी लाईटें बंद कर दें। इसके साथ ही कई कफ्र्यू भी देखें है कि लेकिन आज के जैसा लाॅकडाउन नहीं देखा।


कार्यकारी सम्पादक शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र एवं वेब पोर्टल