गज़ल

डॉ. राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

छीना है जिसने यूँ गरीबों का निवाला,

हर रोज निकले बस उसी का दिवाला।

 

ताला लगा है कई  बरसों से जिस पर ,

उस घर का है  केवल ईश्वर रखवाला ।

 

किसका  हवाला दें भला आज तुमको ,

कौन जानता किसका दिल है ये काला।

 

नाला बहता रहा है  सामने जिन घरों के ,

वही दे रहा अक्सर कोरोना का हवाला ।

 

पड़ा है  जब से पाला गरीबों के खेतों में ,

'पुरोहित' करें कैसे अब उनको उजाला ।

 

भवानीमंडी, राजस्थान