अपरा एकादशी माता भद्रकाली प्राकट्योत्सव

राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

चराचर सृष्टि एवं चतुर्दश भुवनों के अंतर्गत माता जगदम्बा की बहुत बड़ी महिमा हैं। माता भद्रकाली जिनके संकल्प मात्र से ही समस्त जगत चलायमान होता हैं। अपने आप में अनंत ऊर्जा समेटे हुए और उसी ऊर्जा से ही माता भगवती समस्त जगत को प्रकाशमान कर रही है।

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम: ।

नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्मताम्।।

शिवप्रिया शक्तिस्वरूपा माँ भद्रकाली की उत्पति सतयुग के आरंभिक काल में भगवती जगदम्बा स्वरूप माता सती के अपने पिता दक्ष के सार्वभौम यज्ञ में निज देह को आहुति के रुप में हवन कुंड के भीतर दहन कर लिया था, उसी समय भगवान शिव ने अपनी जटाओं से वीरभद्र एवं भद्रकाली को प्रकट किया था। वहीं से अनेकानेक लीला करती हुई माँ भद्रकाली आज पर्यंत दुष्ट शक्तियों का नाश एवं भक्तों के हर संकटों को हरती आई है।

भारतवर्ष में माँ भद्रकाली के बहुत मन्दिर हैं। सभी स्थानों पर स्थापित माता भद्रकाली की भिन्न भिन्न मान्यता है। माता भद्रकाली आदि शक्ति जगदम्बा के अंशावतार के रुप मे युगों-युगों से पूजी जाती है। दारुण संकटों से निवृति एवं भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए माता भद्रकाली की अर्चना करनी चाहिए। 

भद्रं मंगलं सुखं वा कलयति स्वीकरोति भक्तेभ्योदातुम् इति भद्रकाली सुखप्रदा

जो अपने भक्तों का सब ओर से भद्र सुख या मंगल सौभाग्य प्रदान करती है, वह भद्रकाली है। माँ भद्रकाली का प्राकट्योत्सव ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष एकादशी को माना जाता है । 

एकादशी तिथि का आरंभ काल- 17 मई 2020 को 12:45 बजे

एकादशी तिथि का समापन काल - 18 मई 2020 को 15:09 बजे

ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते ।


संस्कृति संरक्षक, आनी (कुल्लू) हिमाचल प्रदेश