नवाचारी शिक्षक कलीम खान का मूलमंत्रः ........एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो


शि.वा.ब्यूरो, सीकर (राजस्थान)।  कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो।
इस शेर को अपने जीवन का मूल मंत्र मान कर अपना कर्म करने वाले नवाचारी शिक्षा अब्दुल कलीम खान राजस्थान के सीकर जिले की पंचायत समिति खंडेला के दायरा गांव निवासी हैं । शैक्षिक नवाचार के गुण इनको विरासत में प्राप्त हुए हैं। इनके स्वर्गीय पिता अब्दुल वहीद खान तृतीय श्रेणी शिक्षक पद से सेवा प्रारंभ करके जिला शिक्षा अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान शिक्षा व समाज सेवा क्षेत्र में अलग पहचान कायम की थी। 
बता दें कि कलीम खान ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरूआत अंशकालीन आशुलिपिक हिंदी व्याख्याता के रूप में झुंझुनू स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय उदयपुरवाटी से की थी। यहां पर इन्होंने 1992 से 1995 तक लगातार चार वर्ष तक अध्यापन कार्य किया था। इसके बाद उन्होंने मदरसा शिक्षा सहयोगी के रूप में मदरसा पठानान कुरेशियान दायरा में अपनी सेवाएं प्रदान की। उनकी लगन के चलते वर्ष 2001 से 2007 तक मदरसे में प्रारंभिक नामांकन 20 से शुरू होकर 175 का हो गया था। मदरसा पैरा टीचर के दौरान अंशकालीन शिक्षक के रूप में कलीम खान ने एक निजी विद्यालय में अपनी सेवाएं प्रदान की। इस दौरान उन्होंने लगातार अपने अध्यापन के बल पर माध्यमिक कक्षाओं का सर्वश्रेष्ठ परिणाम देकर 500 का नकद पुरस्कार प्राप्त किया था।



इसके उपरांत उन्होंने अपनी लगन और परिश्रम के बल पर राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा 2007 में चयनित होकर राजकीय प्राथमिक विद्यालय वेदपुरा पंचायत समिति खंडार जिला सवाई माधोपुर में कार्य ग्रहण किया। सही मायनों में कलीम खान ने यहीं से अपनी सरकारी सेवा प्रारंभ की थी। 2007 से जून 2018 तक इस अपने अध्यापन और व्यवहार के बल उन्होंने शिक्षार्थियों, शिक्षकों, विभागीय अफसरों व क्षेत्रवासियों में अपनी अमिट छाप छोड़ दी थी। समय-समय पर क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी उनकेे कार्य की तारीफ करते नहीं थकते थे। कलीम खान की उत्कृष्ट अध्यापनशैली के बल पर ही उनके विद्यालय को ब्लॉक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ विद्यालय का सम्मान प्राप्त हुआ था। सम्मान की इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए जिला स्तरीय स्वच्छ शाला व स्वस्थ बाला का पुरस्कार भी उनके विद्यालय को प्राप्त हुआ था।



जून 2018 में राज्य सरकार द्वारा स्थानांतरण किए जाने के बाद इन्होंने सीकर के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सेवली पंचायत समिति खंडेला में अध्यापक के रूप में कार्य ग्रहण किया। उस समय गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र में स्थित इस स्कूल में बच्चों का शैक्षणिक स्तर अच्छा नहीं था और कड़ी मेहनत के बावजूद दो माह तक बच्चों में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा था। बात बनती न देख कलीम खान ने यहाँ पर अपनी शिक्षणशैली में परिवर्तन किया और एक अपने मित्र की सहायता से 4 पेज हिंदी पढ़ना सीखने के टाइप करवा कर सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किये। इन्हीं चार पेज को किसी ने राजस्थान की teacher.com वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। वहां इसे बहुत ही अच्छा रेस्पॉन्स मिला, इसके चलते इन चार पेज को इन्होंने मल्टी कलर में प्रिंट करवा कर लागत मूल्य पर उपलब्ध करवाना प्रारंभ किया तो देखते ही देखते हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों के अध्यापकों ने इसे मंगवा कर बच्चों को उपलब्ध करवाया। इसके साथ ही राजस्थान के विभिन्न जिलों में उक्त फोल्डर भिजवाए गए, जहाँ पर बच्चों को बहुत अधिक लाभ मिलने लगा। इससे प्रेरित होकर कलीम खान ने हिंदी अभ्यास पुस्तिका सुंदर लेख लिखने की बनाई। इस पुस्तक में इन्होंने काफी अभ्यास दिए और पुस्तक की कीमत भी बहुत कम रखी। धीरे-धीरे कलीम खान का मनोबल बढ़ता गया और उन्होंने लेमिनेटेड अभ्यास पुस्तिका और फोल्डर का नवीन नवाचार प्रयोग किया। इन दोनों फोल्डर और अभ्यास पुस्तिका पर स्केच पेन या जैल पेन सहायता से अभ्यास कर बार-बार मिटा कर बार-बार लिखा जा सकता था, इससे कागज और पर्यावरण दोनों की रक्षा हो रही थी।



इन नवाचारों के साथ ही साथ कलीम खान ने सीकर के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सेवली खंडेला में अंतोदय संस्था के माध्यम से सीकर जिले के प्रथम खिलौना बैंक की स्थापना करवाई। भामाशाह को प्रेरित कर सर्दी के मौसम में स्वेटर वितरण करवाए। इसके साथ-साथ भामाशाह को प्रेरित कर विद्यालय के बच्चों के लिए एक प्रोजेक्टर की व्यवस्था भी करवाई तथा बच्चों को स्लेट व स्टेशनरी उपलब्ध करवाने के लिए विद्यालय में स्टेशनरी बैंक की स्थापना भी करवाई गई।



विद्यालय और बालकों के प्रति इनके समर्पण को देखते हुए विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं ने कलीम खान को सम्मानित भी किया। भारत के सरकारी शिक्षकों के सबसे बड़े समूह नवोदय क्रांति परिवार ने कलीम खान को राष्ट्रीय अवार्ड के साथ-साथ, स्मार्ट गुरु टीचर अवार्ड से भी सम्मानित किया है। समर्पण और कार्यकुशलता के बल पर कलीम खान को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी स्थान दिया गया है। शिक्षा में शून्य नवाचार के लिए कार्य कर रही अरविंदो सोसाइटी ने भी इन्हें प्रशंसा पत्र प्रदान किया है। ग्लोबल इन्नोवेशन एक्सचेंज संस्था के तत्वाधान में आयोजित समारोह में कलीम खान को ग्रीन टीचर अवार्ड से पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रदान किया गया। इसके साथ ही साथ कलीम खान ने विभिन्न ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिताओं में भाग लेकर प्रमाण पत्र प्राप्त किए हैं।



कलीम खान ने लगभग 10 से अधिक बार रक्तदान किया है। वर्तमान में कलीम खान अपने आपको साहित्यिक गतिविधियों में लगाकर समाज को नई दिशा प्रदान करने की कोशिश कर रहे हैं। कलीम खान अपने इन प्रयासों के पीछे अपने माता-पिता, परिवार के सदस्यों व सभी शुभचिंतकों के आशीर्वाद का प्रतिफल बताते है।