असम विश्वविद्यालय में हिंदी पखवाड़ा के मुख्य समारोह आयोजित

मदन सिंघल, सिलचर। असम विश्वविद्यालय सिलचर में हिंदी पखवाड़ा के मुख्य समारोह का आयोजन किया गया। असम विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के प्रेमेन्द्र गोस्वामी सभाकक्ष में हिंदी पखवाड़ा के मुख्य समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सीपी मीणा, डीआईजी, सीमा सुरक्षा बल, कछार रहे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में नवोदय विद्यालय के प्राचार्य विश्वास कुमार राणा ने शिरकत की।नवोदय विद्यालय के शिक्षक विकास कुमार उपाध्याय वक्ता रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता असम विश्वविद्यालय के कुलपति  संचालन असम विश्वविद्यालय के हिंदी अधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार उपाध्याय ने की। हिंदी दैनिक समाचार पत्र के प्रकाशक दिलीप कुमार कार्यक्रम में उपस्थित रहे।इस अवसर पर प्रशासनिक प्रबंधन में हिंदी: चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य निचोड़ था कि हिंदी की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए उसके विकास के लिए सबको प्रयास करना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि आज प्रौद्योगिकी के युग में हिंदी में काम करना और भी आसान हो गया है।उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा के रूप में कार्यालय में मौजूद तो है ही, परंतु भाषा के रूप में यह तीसरी भाषा के रूप विश्व पटल पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराए हुए है। उन्होंने कहा कि इसको ध्यान में रखते हुए हमको विश्व की प्रथम भाषा के रूप में हिंदी कैसे स्थापित हो इस पर कार्य करना होगा। सभी को मिलकर कार्य करना होगा, तभी हिंदी प्रथम भाषा के रूप में विश्व में स्थापित होगी। 

कार्यक्रम में हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित विविध प्रतियोगिताओं में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कविता में निर्मल दत्त को प्रथम, दर्शना पटवा को द्वितीय, नीला पाल को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। निबंध प्रतियोगिता में फजलुद्दीन अहमद को प्रथम, बबली देव को द्वितीय, अभिजीत चंद्रदेव को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया । आशु भाषण प्रतियोगिता में चंद्रकांत दास को प्रथम, बबली देव को द्वितीय, श्यामल आचार्य जी को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा प्रारूपण के लिए चंद्रकांत दास को प्रथम, श्यामल आचार्य को द्वितीय और मिताली भट्टाचार्य को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम में पृथ्वीराज वाला, हिंदी अनुवादक और संतोष ग्वाला हिंदी टांकक ने विशेष सहयोग प्रदान किया।

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