पं. श्री कृष्णानन्द जी महाराज ने भागवत में वामन अवतार की कथा सुनाई

शि.वा.ब्यूरो, शुकतीर्थ। विश्वकर्मा धर्मशाला में श्री हरिधार्मिक यात्रा संघ के प्रयास से चल रही श्रीमद्भागवत कथा भक्ति रस महोत्सव के तीसरे दिन पं. श्री कृष्णानन्द जी महाराज ने श्री राम जन्मोत्सव व वामन चरित्र अवतार का वर्णन किया। पं. श्री कृष्णानन्द जी महाराज ने भगवान श्री राम की लीलाओं का वर्णन किया। इस पर भक्तों द्वारा झूम कर नृत्य किया। 

कथावाचक ने वामन अवतार की लीला के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि  भगवान विष्णु ने इन्द्र का देवलोक में अधिकार पुनः स्थापित करने के लिए यह अवतार लिया। देवलोक असुर राजा बलि ने हड़प लिया था। बलि विरोचन के पुत्र तथा विष्णु भक्त प्रह्लाद के पौत्र थे और एक दयालु असुर राजा के रूप में जाने जाते थे। यह भी कहा जाता है कि अपनी तपस्या तथा शक्ति के माध्यम से बलि ने त्रिलोक पर आधिपत्य पा लिया था। वामन, एक बौने ब्राह्मण के वेष में बलि के पास गये और उनसे अपने रहने के लिए तीन पग भूमि देने का आग्रह किया। उनके हाथ में एक लकड़ी का छत्र (छाता) था। गुरु शुक्राचार्य के चेताने पर भी बलि ने वामन को वचन दे डाला। भगवान वामन ने अपना आकार इतना बढ़ा लिया कि पहले ही पग में पूरा भूलोक (पृथ्वी) नाप लिया। दूसरे पग में देवलोक नाप लिया। इसके पश्चात् ब्रह्मा ने अपने कमण्डल के जल से वामन के पाँव धोये। इसी जल से गंगा उत्पन्न हुयीं। तीसरे पग के लिए कोई भूमि बची ही नहीं। वचन के पक्के बली ने तब वामन को तीसरा पग रखने के लिए अपना सिर प्रस्तुत कर दिया। वामन बलि की वचनबद्धता से अति प्रसन्न हुये। 

यतः राजा बलि के दादा प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम् भक्त थे, भगवान वामन (विष्णु) ने बलि को सुुताल लोक देने का निश्चय किया और अपना तीसरा पग बलि के सिर में रखा जिसके फलस्वरूप बलि सुताल में पहुँच गये। वामन ने बलि के सिर पर अपना पैर रखकर उनको अमरत्व प्रदान कर दिया। विष्णु अपने विराट रूप में प्रकट हुये और राजा को महाबलि की उपाधि प्रदान की क्योंकि बलि ने अपनी धर्मपरायणता तथा वचनबद्धता के कारण अपने आप को महात्मा सिद्ध कर दिया था। विष्णु ने महाबलि को आध्यात्मिक आकाश जाने की अनुमति दे दी जहाँ उनका अपने सद्गुणी दादा प्रहलाद तथा अन्य दैवीय आत्माओं से मिलना हुआ।मुख्य यजमान के रूप में विकास गोयल सर्राफ व तनु गोयल रही।

कथा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को श्रद्धाभाव के साथ ठाकुर जी को भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान रेणू तोमर, अनुज तोमर, अनन्त वशिष्ठ, भानु वशिष्ठ, विनोद शर्मा, शीतल शर्मा, विकास माहेश्वरी, जयमाला माहेश्वरी, हेमा माहेश्वरी, नव्या माहेश्वरी, श्रेष्ठ माहेश्वरी, प्रज्जवल माहेश्वरी,अमित तोमर, रविंद्र सिंह, लक्ष्मी तोमर, रश्मि तोमर, सविता तोमर, राजबाला तोमर, सतबाला तोमर, पुष्पा तोमर, मनु लाटियान, मीतू लाटियान, ममता लाटियान, पे्रमलता त्यागी, कुुमुध, उषा त्यागी, शशि त्यागी, तुलसा देवी, रिंकी श्रीवास्तव, अनमोल श्रीवास्तव, महेश श्रीवास्तव, तरूणा शर्मा, रक्षित कौशिक, कुलदीप कौशिक, अल्का कौशिक, संसार सिंह, अनन्त वशिष्ठ, भानु वशिष्ठ, विनोद शर्मा, शीतल शर्मा, विकास माहेश्वरी, जयमाला माहेश्वरी, हेमा माहेश्वरी, नव्या माहेश्वरी, श्रेष्ठ माहेश्वरी, प्रज्जवल माहेश्वरी, तरूणा, अनिता माहेश्वरी, अनिल माहेश्वरी, पूनम गुप्ता, राघव गुप्ता, सचिन गुप्ता, निशा माहेश्वरी, डिम्पल माहेश्वरी, अनिता माहेश्वरी, रितिका माहेश्वरी, अर्पिता माहेश्वरी, अंश माहेश्वरी, विनीत माहेश्वरी, शालू माहेश्वरी, गौरव वर्मा, सारिका वर्मा, सौरभ वर्मा, संजीव गर्ग, सुमन गर्ग, अंशु, रामचंद्र, दीपा शर्मा, धीरज शर्मा, बबीता, महिपाल सिंह, कविता, मीनू गुप्ता, अनिल वर्मा सर्राफ, अशोक वर्मा, साधना वर्मा, कीर्ति वर्मा आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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