अलीगढ़ के एक घर में घुसे तेंदुए को पकड़कर सहारनपुर शिवालिक वन क्षेत्र में छोड़ा

गौरव सिंघल, सहारनपुर। आठ साल के तेंदुए को यहां वन क्षेत्र की पहाडि़यों में सुरक्षापूर्वक छोड़ दिया गया। जिला वनाधिकारी श्वेता सेन ने आज बताया कि इस जवान तेंदुए को आगरा वन विभाग, इटावा लायन सफारी की टीम और एसओएच नामक एनजीओ के सदस्यों ने दस घंटे का बचाव अभियान चलाकर अलीगढ़ के कस्बा जवां में शनिवार देर रात पकड़ा था। तेंदुआ पूरी तरह से स्वस्थ है। अलीगढ़ वन विभाग और एनजीओ की टीमें इस तेंदुए को लेकर यहां पहुंची। 

क्षेत्रीय वनाधिकारी मनोज कुमार बलोदी की अगुवाई वाली टीम की देखरेख में इस तेंदुए को यहां शिवालिक रेंज की पहाडि़यों में सफलतापूर्वक छोड़ दिया गया। जिला वनाधिकारी श्वेता सेन ने बताया कि शिवालिक रेंज में इससे पूर्व भी कई तेंदुए सुरक्षित छोड़े जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि तेंदुए को पिंजरे से छोड़ने के दौरान बड़ा भारी जोखिम रहता है। उन्होंने कहा कि इस बात का डर बना रहता है कि तेंदुआ पिंजरे से निकलकर जंगल में भागने के बजाए वापस वन कर्मचारियों और अधिकारियों पर हमला ना कर दे। उन्होंने कहा कि सावधानी के तौर पर इस दौरान कम से कम प्रशिक्षित वन रक्षक उपस्थित रहते हैं। इस तेंदुए को छोड़े जाने के दौरान 10 से 12 प्रशिक्षित वन कर्मचारी मौजूद रहे।

जिला वनाधिकारी श्वेता सेन ने यह भी बताया कि शिवालिक रेंज की पहाडि़यों एवं जंगल में छोड़े जाने की अनुमति चीफ वाईल्ड लाइफ वार्डन ने दी थी। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू आपरेशन के दौरान पकड़े जाने वाले उन्हीं जानवरों को जू और लायन सफारी में तभी रखे जाते हैं, जब वे उम्र दराज हों अथवा वे अपने शिकार आदि करने की क्षमता को गंवा चुके हों या उनके दांत आदि टूट गए हों। स्वस्थ और जवान पकड़े गए तेंदुओं को घने जंगलों में ही छोड़ा जाता है, जो उनके रहने और भ्रमण करने का सुरक्षित स्थान भी होता है।