आश्वासन पर भाकियू का धरना समाप्त, बजाज हिंदुस्थान शुगर की परीक्षा शुरू

हवलेश कुमार पटेल, बुढ़ाना। आजाद भारत के इतिहास में बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड सरकार की नीतियों पर विश्वास करके धोखा खाने वाला औद्योगिक संगठन बनकर रह गया है। सरकार की नीतियों पर विश्वास करके जोखिम उठाने के कारण आज हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि गन्ना भुगतान की मांग को लेकर भैसाना बजाज शुगर लिमिटेड मिल पर आयोजित भारतीय किसान यूनियन का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन  आज इस आश्वासन पर समाप्त किया गया कि मिल 10 फरवरी तक किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान हर हालत में कर देगा। भाकियू के जिला महासचिव अनुज बालियान ने बताया कि मिल पर 300 करोड़ रुपये किसानों का गन्ना भुगतान बकाया है। 

भारतीय किसान यूनियन अपनी घोषणा के अनुसार बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान की मांग को लेकर हिन्दुस्थान गु्रप की शुगर यूनिट भैसाना मिल के खिलाफ आज किसानों ने मिल का घेराव करते हुए महापंचायत की। भाकियू कार्यकर्ताओं ने किसानों द्वारा लाये गये आवारा पशुओं को भी मिल गेट पर बांधकर आवागमन बंद करा दिया। हालांकि पुलिस-प्रशासन ने कई सड़कों पर बेरिकेटिंग कर आवागमन बंद करा दिया गया था, इसके बावजूद भी हजारों की संख्या में किसान यहां पहुंचे। धरने को सम्बोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चै. नरेश टिकैत ने कहा कि गन्ने का भुगतान न मिलने से किसान अपने बच्चों की फीस तक जमा नहीं कर पर रह है। सरकार ने अभी तक गन्ने के रेट तक घोषित नहीं किए है। उन्होंने कहा कि शुगर मिल अपनी चीनी, शीरा, मैली व खोई सभी सामान बेच रही है, फिर भी किसानों का भुगतान नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि आवारा पशुओं ने फसल बरबाद कर दी है। उन्होंने कहा कि अब किसान आंदोलन को तैयार है। यहां पर दिन रात धरना चलाने के लिए भाकियू ने वहीं पर भट्टी, टैंट आदि का पूरा इंतजाम कर रखा था।

बता दें कि वर्ष 2004 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन 29वें मुख्यमंत्री के रूप में मुलायम सिंह यादव ने बदहाली के दौर से गुजर रहे गन्ना किसानों की दिशा व दशा सुधारने के लिए गन्ना व चीनी उद्योग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया था। इसी निर्णय के तहत मुलायम सिंह यादव ने शुगर इंडस्ट्री को राहत पैकेज देने के लिए शुगर प्रमोशन पाॅलिसी लागू की थी, जिससे देश के उद्योगपतियों को उत्तर प्रदेश की शुगर इंडस्ट्री में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। वर्ष 2004 में शुगर प्रमोशन पाॅलिसी लागू होते ही बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड के कर्ताधर्ता कुशाग्र बजाज ने भारी भरकम कर्ज लेकर शुगर इंडस्ट्री में मोटा निवेश किया था। सरकार बदलते ही शुगर प्रमोशन पाॅलिसी एकदम से समाप्त किए जाने से बजाज हिन्दुस्थान की शुगर मिलों की हालत बदतर हो गयी, क्योंकि उस पर बैंकों सहित अन्य देनदारियों का बड़ा पहाड़ खडा हो गया था। यदि सरकार की नीतियां सही चलती रहती तो बजाज हिन्दुस्थान की शुगर मिलों की ये हालत नहीं होती कि किसानों को गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए धरना-प्रदर्शन करना पडे।

खैर मामला चाहे जो हो, लेकिन भाकियू की चेतावनी और मिल प्रशासन के आश्वासन से फिलहाल तो स्थिति सम्भल गयी है, लेकिन तय समय सीमा में बकाया गन्ना मूल्य भुगतान करने के लिए शुगर मिल की परीक्षा आरम्भ हो गयी है, अब ये तो समय ही बतायेगा कि मिल प्रशासन इस परीक्षा में कैसे पास होगा।