कत्थक नृत्यांगना मौमाला नायक के सुर-लय-ताल की त्रिवेणी से प्रिल्यूड का प्रांगण सराबोर हुआ

शि.वा.ब्यूरो, आगरा। प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल में स्पिकमैके के तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कत्थक नृत्य कलाकार व पंडित बिरजू महाराज की शिष्या मौमाला नायक द्वारा कत्थक नृत्य पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कत्थक मैस्ट्रो मौमाला नायक, विद्यालय के निदेशक डॉ. सुशील गुप्ता, प्राचार्य जगदीश सिंह धामी व प्रमुख समन्वयक संजय शर्मा ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। 

मौमाला नायक ने कार्यशाला में नृत्य प्रदर्शन का आरंभ अपने गुरु पंडित बिरजू महाराज को स्मरण व नमन करते हुए उन्हीं के द्वारा रचित अर्द्धनारीश्वर स्तुति के साथ किया। उन्होंने बताया कि नृत्य; अंग, उपांग व प्रत्यंग का विशुद्ध संयोजन है, जिसमें हम अपने मन के भावों को अंग संचालन द्वारा प्रकट करते हैं। उन्होंने कत्थक में प्रयुक्त होने वाली विभिन्न तालों व बोलों का परिचय देते हुए शिखर ताल का प्रदर्शन करते हुए अपने घुंघरुओं की झंकार से प्रिल्यूड के सभागार को झंकृत कर दिया।

फिनाले प्रदर्शन में उन्होंने भगवान विष्णु के दशावतार की कथा को कत्थक की मनोहर प्रस्तुति के साथ प्रदर्शित करके सभी दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। मौमाला नायक ने विद्यार्थियों को कत्थक की विभिन्न मुद्राओं व पद थाप की बारीकियांँ बताते हुए कत्थक नृत्य में भाव-भंगिमा करते समय अंग संचालन के महत्व को समझाया । उन्होंने कत्थक की कई सूक्ष्म भाव-भंगिमाओं के प्रदर्शन द्वारा तकनीकी पक्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने अभ्यास के विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि कत्थक नृत्य में अभ्यास का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि हम अक्सर अपने हस्तक, हाव-भाव के विषय में ध्यान नही देते हैं परन्तु हमें ध्यान देना चाहिए। 
दीपक प्रहलाद ने कहा कि कला का उपासक बनकर साधना करने से ही कला को आत्मसात कर सकते हैं और अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि अपनी प्राचीन संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखना हम सभी का परम कर्तव्य है। विद्यालय के निदेशक डॉ सुशील गुप्ता ने कहा कि मौमाला जी को कत्थक का पर्याय कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी एवं उनके द्वारा कत्थक में समावेशित वैज्ञानिक पहलुओं की प्रशंसा की। कार्यक्रम में मनीष गुप्ता, दीपक प्रहलाद, शुभी दयाल, तृप्ति गुप्ता, मनोज बल, वीके गोयल, अरविंद कपूर की उपस्थिति सराहनीय रही। प्राचार्य जगदीश सिंह धामी ने आभार व्यक्त करते हुए मौमाला नायक को भारतीय संगीत कला के संरक्षण में स्वयं को समर्पित करने पर हार्दिक बधाई दी।
कार्यशाला के माध्यम से प्रिल्यूड के साथ-साथ सन फ्लावर स्कूल व एसएस कॉन्वेंट स्कूल के विद्यार्थियों व उनके नृत्य शिक्षक भी लाभांवित हुए। कार्यक्रम का संचालन शालू जैन ने किया। सीसीए कोर्डिनेटर अर्पणा सक्सैना व नृत्य शिक्षिका पूजा गुप्ता का विशेष योगदान रहा।

बता दें कि स्पिकमैके (द सोसाइटी ऑफ द प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर अमंग यूथ) एक स्वैच्छिक युवा आंदोलन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1977 में हुई थी। यह संस्था विद्यार्थियों व युवाओं में पारंपरिक भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने और भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और विरासत के बारे में जागरूकता पैदा करने का प्रयास करती है।