मेरी कलम - मेरे कलाम
डॉ. अवधेश कुमार "अवध", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
मेरी कलम और मेरे कलाम से
उतर जाते हैं कइयों के नकाब
जब वक्त करवट लेता है
टूट पड़ते हैं सारे बहुरुपये,छली
एक साथ
रोकने मेरी कलम
रोकने मेरे कलाम
पर कान खोलकर सुन लो
सत्य परेशान होता है, पराजित नहीं
तुम्हारी गीदड़ भभकी से
न मेरी कलम रुकेगी
न मेरे कलाम 
सबको राम - राम।
साहित्यकार व अभियंता मैक्स सीमेंट, ईस्ट जयन्तिया हिल्स मेघालय