पितरों को दिखाया आकाश दीप

कार्तिक कुमार परिच्छा, सरायकेला पावन कार्तिक माह के अवसर पर  सरायकेला मांजना घाट मे स्थानीय मुलवासी ओड़िया समुदाय के महिलाओं द्वारा  राई दामोदर पूजन पश्चात  आकाशदीप देने का जगन्नाथ परंपरा  बड़े ही धुमधाम से जारी है यह धार्मिक अनुष्ठान आगामी   पूर्णिमा तक चलेगा। 

अतीत की इस देशी ओड़िया रियासत में विगत पच्चीस दिनों से बड़े तबके से ओड़िया समुदाय की महिलाएं खरखाई नदी के जल में स्नान कर निकट बालुका पूजन कर रही है। उन्होंने आकाश दीप जलाकर अपने पितरों को आज विदा करने का धार्मिक परंपरा का निर्वाह किया। जगन्नाथ संस्कृति के अनुसार जिन पितरों के वे विगत दुर्गा पूजा के पहले पितृपक्ष में नवान्न भक्षण हेतु आवाहन किया गये थे, उन्हें विदा करने की परंपरा में आकाशीय दीप दान महत्वपूर्ण आयोजन जगन्नाथ परंपरानुसार होता है। जब यह इलाका उत्तर कलिंग प्रदेश हुआ करता था, तब जिसकी राजधानी कभी तोषाली रही। 1948 तक यह सरायकेला रियासत का एक महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहार भी रहा। 
आज भी यहां के समुचे ओडिशा सहित विदेशों में रह रहे ओड़िया समुदायों द्वारा कार्तिक महिने का यह उत्सव बड़े ही धुम धाम से  मनाई जाती है। इस त्योहार को लेकर कल स्थानीय मांजना घाट शिवालय के समीप देर शाम महिलाएं एकत्रित हो कर एक एक बांस के डंडे मे मटके के अंदर बड़ा दीप रखकर खुले आकाश में  पितरों के निमित्त बत्ती देकर स्वर्ग लौटने का  मार्ग दिखाया, जिसे निहारने एवं अपने अपने पितरों को विदा करने हेतु श्रद्धालु देर रात तक यहां आते रहे।