प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा0 दिनेश कुमार की अपील: एलएसडी बीमारी से डरने की नहीं सतर्क रहने की जरूरत

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा0 दिनेश कुमार ने बताया कि जनपद में एलएसडी बीमारी से ग्रसित 414 नये पशु चिन्हित किये गये हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व से ग्रसित पशुओं में से 2439 पशु स्वस्थ हो गये हैं। उन्होंने कहा कि यह बीमारी एक संक्रामक रोग विषाणुजनित बीमारी है। उन्होंने कहा कि अधिकांशतः यह बीमारी गोवंशीय पशुओं में पायी जाती है, रोग का संचारण, फैलाव, प्रसार पशुओं में मक्खी, चीचडी एवं मच्छरों के काटने से होता है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से प्रभावित पशुओं को बुखार होना, पूरे शरीर में जगह-जगह नोड्यूल/गांठों का उभरा हुआ दिखाई देना है। उन्होंने कहा कि बीमारी से ग्रसित पशुओं में मृत्यु दर अनुमानित 1 से 5 प्रतिशत है।

डा0 दिनेश कुमार ने बताया कि बीमारी की रोकथाम हेतु आवश्यक है कि बीमारी से ग्रसित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना, पशुओं में बीमारी को फैलाने वाले घटकों की संख्या को रोकना अर्थात् पशुओं को मक्खी, चीचडी, मच्छरों के काटने से बचाना, पशुशाला की साफ-सफाई दैनिक रूप से करना तथा डिस्इंफेक्शन (जैसे-चूना आदि) को स्प्रे करना, मृत पशुओं केे शव को गहरे अर्थात् न्यूनतम 5-6 फीट गहरे गड्ढे में  दबाया जाना आवश्यक है। उन्होंने पशु पालको से अनुरोध किया कि वह अपने बीमारी से ग्रसित पशुओं को स्वस्थ पशु से अलग बांधे।
प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि पशु की शरीर की चमड़ी पर पायी जाने वाली गांठे मनुष्यों में नहीं आती है। उन्होंने कहा कि यह रोग जूनोटिक नहीं है, अतः यह रोग पशुओं से मनुष्यों में नहीं फैलता है। यह मनुष्यों का रोग नही है। उन्होंने कहा कि इस रोग से ग्रस्त पशु के दूध को काम में लेने से मनुष्य बीमार नहीं होता है। उन्होंने कहा कि इस रोग से ग्रस्त पशु के दूध को उबालकर काम में लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह रोग आने पर पशु की मृत्यु जरूरी नहीं है, इस रोग से पशु के स्वस्थ होने की पूरी सम्भावना है। इस रोग की मृत्यु दर मात्र 1-5 प्रतिशत ही है। उन्होंने कहा कि इस रोग पर नियन्त्रण पाना मुश्किल नहीं है। उन्होंने कहा कि रोग ग्रस्त पशु के पृथककरण, आवागमन पर रोक, मच्छर, मक्खियों, बाह्य परजीवियों पर नियंत्रण एवं उपचार कर इस रोग पर आसानी से नियन्त्रण पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस रोग से बचाव का टीका उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि इस रोग के बचाव हेतु गॉटपॉक्स का टीका उपलब्ध होने वाला है, यह केवल उन्ही क्षेत्रों में लगाया जाता है, जहॉ एक भी पशु इस रोग से ग्रस्त नही है।
प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा जनपद की समस्त गौशालओं तथा 475 ग्राम सभाओं में डिस्इन्फैक्शन स्प्रे कराया गया है। उन्होंने कहा कि उक्त बीमारी के सम्बन्ध में सूचना आदान-प्रदान करने तथा बीमारी की सूचना उपलब्ध कराने के लिये जनपद स्तर पर कलेक्ट्रेट में स्थापित कन्ट्रोल रूम नं0-9897715888, 9897749888 पर सूचित कर सकते है।
उन्होंने सभी ग्रामवासियों से अपील की है कि वह अपने-अपने गोवंशीय पशुओं में टीकाकरण कराये, टीकाकरण रोस्टर के अनुसार टीम आपके ग्राम में आपके घर जाकर निःशुल्क टीकाकरण करेगी। उन्होंने कहा कि टीकाकरण केवल रोस्टर के अनुसार किया जायेगा, वर्तमान में बीमारी पर नियंत्रण है। उन्होंने कहा कि सभी ग्रामवासी धैर्य बनाकर रखें, पैनिक होने की आवश्यकता नही है, जनपद में पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध है।