बेटी

डॉ. अ. कीर्तिवर्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

बेटियाँ पढ रही हैं, और आगे बढ रही हैं,
धरा की बात क्या, गगन तक बढ रही हैं।
घर आँगन से विज्ञान शिखर तक वो छायी,
बेटियाँ कुछ शोहदों से, क्यों डर रही हैं?

शायद कुछ कमी हमारे संस्कारों में हो रही है,
माँ बाप, समाज से, कहीँ कुछ चूक हो रही है।
घटने लगी नैतिकता, बुजुर्गों में भी अब तो,
आधुनिकता की होड, जब से यहां बढ रही है।

आओ नैतिकता का परचम, जहां में फहरायें,
बेटीयों को सक्षम और सामर्थ्यवान भी बनायें।
चाहे जो छूना, किसी बहन- बेटी का आँचल,
दुष्टों को जहन्नुम का रास्ता, तत्काल दिखायें।
विद्यालक्ष्मी निकेतन, 53-महालक्ष्मी एन्क्लेव, मुज़फ्फरनगर उत्तर प्रदेश