दिवंगत भाजपा विधायक निर्भय पाल शर्मा का 75 वां जन्म जयंती समारोह आयोजित
गौरव सिंघल, सहारनपुर। राजनीति में शुचिता स्थापित करते हुए भारत को विकासशील राष्ट्र से विकसित राष्ट्र बनाने के जीवन पर्यंत प्रयास करने वाले सरसावा विधायक दिवंगत नेता एवं निर्भयपाल शर्मा की 75 वीं जन्म जयंती समारोह को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि व्यक्ति का दुनिया से जाना पारवारिक क्षति होती है और व्यक्तित्व का जाना सामाजिक क्षति होती है। 
सतीश महाना ने तीन बार के विधायक रहे दिवंगत निर्भय पाल शर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व इतना आकर्षक एवं चुम्बकीय था कि जब पहली बार उन्हें सदन में देखा था तब वह राज्य सरकार में मंत्री थे और स्वयं उनसे जाकर मिला तो ज्ञात हुआ कि वह 1985 में पहली बार विधायक बनकर सरसावा विधानसभा से सदन में आ चुके है और उनकी अंग्रेज़ी भाषा पर पकड़ तथा उनका विज़न देखकर उनसे प्रभावित हुआ था। उनका कहना था कि जब वह पहली बार निर्वाचित होकर विधानसभा में वर्ष 1991 में उत्तर प्रदेश की विधान सभा मे पहुंचे थे तब उनका कार्यकाल कुछ ही महीनो का रहा था और प्रदेश की सरकार को भंग कर दिया गया था लेकिन प्रायः देखने में आता है कि जनप्रतिनिधियों में ये चर्चा होती है कि पहले वाले जन प्रतिनिधि ने अच्छा काम नहीं किया है, जबकि उन्हें अपने पद जाने की आशंका बनी रहती है लेकिन समाज हित मे काम करने वाले को कभी ऐसी आशंकाएं नही घेरती है। 
सतीश महाना ने कहा कि निर्भय पाल शर्मा ने अपने नाम को सार्थकता देते हुए समाज को दिशा देने का काम किया। उन्होंने विधायको से सांसद बने जन प्रतिनिधियों के सम्बंध में कहा कि वे प्रदेश कि नर्सरी से बढ़कर देश की सेवा कर रहे है और परिवर्तन का प्रयास कर रहे है। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा उपयोग किये जाने वाले प्रत्येक अक्षर के कई-कई अर्थ होते है जिनसे सीखने की ज़रूरत है और वह मार्गदर्शन भी करते है। उन्होंने वर्ष 2000 में निर्भय पाल शर्मा की हुई हत्या को  उत्तर प्रदेश की बड़ी हानि बताया और उनकी कार्यशैली को अनुकरणीय बताया। केंद्रीय मंत्री डॉक्टर संजीव बालियान का कहना था कि भले ही उन्हें कभी निर्भय पाल शर्मा जैसी शख्सियत से मिलने के सौभाग्य नहीं मिला हो परंतु उनके सुपुत्र राघव लखन पाल शर्मा का साथ लोकसभा में ज़रूर मिला है और राघव लखमा पाल शर्मा में उनके संस्कार पूरी तरह से परिलक्षित होते है ओर वह दिल्ली उनके साथ जाते रहे है और जब से वह मंत्री बने है, उन्होंने कभी दिल्ली आकर उनसे मुलाकात नहीं की, बल्कि अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए जनता की सेवा में लगे रहते है।
उन्होंने राघव लखन पाल शर्मा को राजनीति में अपने से वरिष्ठ बताते हुए कहा कि वह दो बार विधायक भी निर्वाचित हुए है। पूर्व सांसद राघव लखन पाल शर्मा ने कहा जब वह पहली बार विधायक बनकर सदन में पहुंचे थे तब उन्हें बजट सत्र पर बोलना था और वह बैचैनी महसूस कर रहे थे तब मेरी मनोदशा को समझते हुए मुझे अग्रज की तरह मार्गदर्शन करने वाले यही सतीश महाना जी थे जो अपनी अग्रिम पंक्ति छोड़कर पीछे मेरी पंक्ति में आकर बैठ गए और जब तक मेरा संबोधन रहा इनका आशीष और स्नेह रूपी हाथ पीठ पर रहा। राघव लखन पाल शर्मा के अनुज राहुल लखनपाल शर्मा द्वारा दिवंगत विधायक और अपने पिता निर्भय पाल शर्मा के जीवन पर आधारित बनाई 10 मिनट  की स्लाइड में उनके जन्म से लेकर उनकी रचनात्मक सेवाओ को चित्रों के रूप में प्रस्तुत करते हुए उनके सम्बंध में जानकारी दी और नाम को सार्थकता देने के लिए उनके जीवन पर सांसद डॉक्टर बलदेव प्रसाद सहित अन्य महान लोगो का प्रभाव रहा, ये भी विस्तार से समझाया और उनके वीरगति को प्राप्त होने तक का उल्लेख किया। 

मंत्री कुंवर बृजेश सिंह ने भी निर्भय पाल शर्मा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला और उनके आदर्शों को आत्मसात करने की बात कही वही राज्य मंत्री जसवंत सैनी ने बताया कि जब वह विद्यार्थी परिषद का कार्य देखते थे तब उनकी कई बार मुलाकात निर्भय पाल शर्मा जी से हुई और वह नाम के ही नही बल्कि व्यवहार से भी निर्भीक थे और उनके सानिध्य में बहुत कुछ सीखने का अवसर भी मिला। उनके साथी रहे कांग्रेस के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ नेता सुरेंद्र कपिल ने जहां पूर्व विधायको को भी संरक्षण देने की अपेक्षा विधानसभा अध्यक्ष से करते हुए बनने और भूत की भूमिका से होने वाली दिक्कतों का उल्लेख करते हुए लोगो को गुदगुदाया वहीं महिलाओ को एक दिन का सत्र सौंपने और विश्व भर में इतिहास रचने पर भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि निर्भय पाल शर्मा नाम से ही नहीं बल्कि काम से भी निर्भय थे जो स्पष्ट बात मुंह पर कहने से नही डरते थे और ये भी नहीं देखते थे कि सरकार किसकी है। उन्होंने बिजली संकट काल मे निर्भयपाल शर्मा की भूमिका का भी उल्लेख किया। गणमान्य लोगों से भरे जनमंच सभागार में आयोजित समारोह की अध्यक्षता कर रहे अंतराष्ट्रीय ख्याति के योग गुरु दीपंकर महाराज ने सनातन संस्कृति के उद्घोष सहित अपने संबोधन में कहा कि धर्म निरपेक्ष नहीं होता बल्कि राजनीति शरीर और धर्म उसकी आत्मा होती है। जिसका संगम वह यहां व्यवहारिक रूप से देख रहे है। एक और जहां राजनीति के महान लोगो की उपस्थिति है वही दूसरी और सनातन से विप्र समाज की गौरवशाली उपस्थिति है। उन्होंने रश्मि रथी का उल्लेख करते हुए देश की स्वतंत्रता के 75 वे अमृत महोत्सव सहित निर्भय पाल शर्मा के 75 वे जन्म जयंती समारोह का उल्लेख करते हुए सभी की मंगल कामनाएं की। 
इस अवसर पर संत समाज को मंत्रियो और जन प्रतिनिधियों ने शॉल ओढ़ाकर उनका अभिवादन कर आशीष प्राप्त किये।पंडित कमल नयन जी द्वारा भावजंलि हेतु श्लोक पढ़े जबकि मानस मण्डल के पंडित अनिल शर्मा द्वारा मधुर वाणी में भजनों से गणमान्य लोगों को अभिभूत किया। आयोजन में निर्भय पाल शर्मा की 96 वर्षीय माता जी श्रीमतीं कुंती पाल, धर्म पत्नी प्रकाश कौर, सांसद प्रदीप चौधरी, पूर्व मंत्री नवाब सिंह नागर,चन्द्र मोहन प्रांतीय नेता, ज़िला पंचायत अध्यक्ष मांगेराम, मेयर संजीव वालिया, विधायक देवेंद्र निम, राजीव गुम्बर, कीरत सिंह, मुकेश चौधरी, सहित पूर्व विधायक माम चंद लाम्बा, लाज कृष्ण गांधी, शशिबाला पुंडीर, वीरेंद्र ठाकुर, जगपाल सिंह, नरेश सैनी, महावीर सिंह राणा, पूर्व डीजीसी विशम्भर सिंह पुंडीर, महेंद्र तनेजा, जयनाथ शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, जिलाध्यक्ष डॉ0 महेंद्र सैनी, नगर अध्यक्ष राकेश जैन, तेज कुमार क्वात्रा पुर्व पालिका चेयरमैन हरीश मलिक,सहित उद्यमी एवं व्यापारी नेता उपस्थिति रहे।