तत्काल प्रभाव से पशु पैठ एवं पशु बाजारों पर रोक
गौरव सिंघल, सहारनपुर। जिलाधिकारी अखिलेश सिंह की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में गोवंश में फैल रही लम्पी स्किन बीमारी की रोकथाम हेतु उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की गयी। बैठक में जिलाधिकारी द्वारा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश एवं पशुपालकों के लिए आवश्यक सुझाव दिये गये।
डीएम अखिलेश सिंह ने निर्देश दिए कि जनपद में लगने वाले पशु पैठ एवं पशु बाजारों पर तत्काल रोक लगायी जाए। साथ ही जनपद में अन्य जिलों एवं राज्यों से आने वाले पशुओं तथा जनपद से बाहर जाने वाले पशुओं पर भी रोक लगायी जाएं। उन्होने निर्देश दिए कि छुट्टा पशुओं को पकडकर भी अलग से ही रखें। उन्होंने जिला पंचायती राज अधिकारी को निर्देश दिए कि ग्राम प्रधानों के साथ बैठक कर यह सुनिश्चित करें कि गांव में दवाई का छिडकाव बेहतर ढंग से किया जाएं। उन्होंने कहा कि ब्लॉक स्तर पर खण्ड विकास अधिकारी एवं तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी नोडल होंगे। 
उन्होंने उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि गौशालाओं में बीमारी से प्रभावित गोवंश को अलग से रखने की अस्थायी व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि अफवाहों पर तत्काल रोक लगाते हुए जन सहभागिता के माध्यम से इस बीमारी से बचाव का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाएं एवं जनपद के मुख्यालय, तहसील, ब्लॉक स्तर पर कन्ट्रोल रूम बनाने के निर्देश दिए। तत्कालिक रूप से समस्याओं के निदान के लिए कन्ट्रोल रूम के नम्बर- 9411913560, 9457609022 जारी कर दिये गये है। 

निदेशक प्रशासन एवं विकास पशुपालन विभाग डॉ0 इन्द्रमनि ने बताया कि यह बीमारी एक संक्रामक रोग विषाणु जनित बीमारी है, यह बीमारी गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं में पायी जाती है। रोग का संचरण, फैलाव, प्रसार पशुओं में मक्खी, चिचड़ी एवं मच्छरों के काटने से होता है। लम्पी स्किन डिजीज बीमारी के मुख्य लक्षण पशुओं में हल्का बुखार होना, पूरे शरीर में जगह-जगह नोड्यूल/गांठो का उभरा हुआ दिखाई देना। बीमारी से ग्रसित पशुओं की मृत्युदर अनुमान 1 से 5 प्रतिशत होना। उन्होंने बीमारी के रोकथाम एवं नियंत्रण के उपाय बताते हुए कहा कि बीमारी से ग्रसित पशुओं को स्वस्थ्य पशुओं से अलग रखें। पशुओं में बीमारी को फैलाने वाले घटकों की संख्या को रोकें अर्थात पशुओं को मक्खी, चिचड़ी एवं मच्छरों के काटने से बचाएं। पशुशाला की साफ-सफाई दैनिक रूप से करें तथा डिसइन्फैक्शन जैसे चूना आदि को स्प्रे करें। संक्रमित स्थान की दिन में कई बार फोरमेलिन, ईथर, क्लोरोफॉर्म, एल्कोहल से सफाई करें। संक्रमित पशुओं को खाने के लिए संतुलित आहार तथा हरा चारा दें। मृत पशुओं के शव को गहरे गड्ढे में दबाएं। 
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ0 राजीव सक्सैना ने अवगत कराते हुए बताया कि संक्रमण से बचाव हेतु आंवला, अश्वगन्धा, गिलोय एवं मुलठी में से किसी एक को 20 ग्राम की मात्रा में गुड़ मिलाकर सुबह शाम लड्डू बनाकर खिलायें अथवा तुलसी के पत्ते एक मुठ्ठी, दालचीनी 05 ग्राम, सोंठ पाउडर 05 ग्राम, काली मिर्च 10 नग को गुड में मिलाकर सुबह शाम धुऑ करें। संक्रमण रोकने के लिए पशुबाड़े में गोबर के कण्डे में गूगल, कपूर, नीम के सूखे पत्ते, लोबान को डालकर सुबह शाम धुंआ करें। पशुओं के स्नान के लिए 25 लीटर पानी को एक मुठ्ठी नीम की पत्ती का पेस्ट एवं 100 ग्राम फिटकरी मिलाकर प्रयोग करें। घोल के स्नान के बाद सादे पानी से नहलायें। संक्रमण होने के बाद देशी औषधि व्यवस्था के अन्तर्गत नीम के पत्ते एक मुठ्ठी, तुलसी के पत्ते एक मुठ्ठी, लहसुन की कली 10 नग, लौंग 10 नग, काली मिर्च 10 नग, जीरा 15 ग्राम, हल्दी पाउडर 10 ग्राम, पान के पत्ते 05 नग, छोटे प्याज 02 नग, पीसकर गुड़ में मिलाकर सुबह शाम 10-14 दिन तक खिलायें। खुले घाव में लिए देशी उपचार के लिए नीम के पत्ते एक मुठ्ठी, तुलसी के पत्ते एक मुठ्ठी, मेहंदी के पत्ते एक मुठ्ठी, लहसून की कली 10 नग, हल्दी पाउडर 10 ग्राम, नारियल का तेल 500 मिली0 को मिलाकर धीरे-धीरे पकाये तथा ठण्डा होने के बाद नीम की पत्ती पानी में उबालकर पानी से घाव साफ करने के बाद जख्म पर लगायें। किसी भी पशु में बीमारी होने पर नजदीक के पशु चिकित्सालय पर सर्म्पक करके उपचार करायें, किसी भी दशा में बिना पशुचिकित्सक के परामर्श के कोई उपचार स्वयं न करें।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी  विजय कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व रजनीश कुमार मिश्र,  संयुक्त निदेशक पशुपालन डॉ0 विजय सिंह, एडी पशुपालन डॉ0 आनन्द कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 संजीव मांगलिक, अपर नगर आयुक्त  एस0के0तिवारी, उप जिलाधिकारी नकुड अजय कुमार अम्बष्ट, उप जिलाधिकारी रामपुर मनिहारान सुश्री संगीता राघव सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।