अभिभावकों औंर बच्चों में लायें पॉजिटिव थॉट साकारात्मक सोच


 

प्रीति शर्मा "असीम" , शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 बच्चों तथा अभिभावकों के बीच सामंजस्य स्थापित कर पाना आज के समय की एक बहुत बड़ी समस्या का रूप ले रहा है ।तकनीक के अधिक उपयोग के कारण समाज ,समाजिक परिवेश से अलग-थलग हो गया है वही  सबंध भी डिजिटल श्रेणी में आ गए हैं।  बच्चों के व्यवहार को समझते हुए माता -पिता को  किस प्रकार व्यवहार करना चाहिए यह व्यवहारिकता  बच्चों और अभिभावकों के बीच में एक कड़ी का काम करके  बच्चों की समस्याओं को समझने में मदद कर सकती है। जैसे- जैसे बच्चे बड़े हो रहे होते  हैं ,बच्चों के स्वभाव की व्यवहारिकता  में उनके व्यवहार में ऐसे परिवर्तन क्यों आ रहा है इस ओर खास ध्यान देना चाहिए। उन कारणों को जानने की कोशिश करनी चाहिए जिन के कारण बच्चा इस प्रकार का व्यवहार कर रहा है । माता -पिता को उसके व्यवहार को समझना चाहिए ना कि उन  पर चिल्लाना और उन पर गुस्सा करना चाहिए उसके व्यवहार में आयें ।इन परिवर्तनों को जानने की कोशिश करनी चाहिए उन्हें उत्साहित करना चाहिए ताकि वह अपने माता-पिता से बिना किसी झिझक के अपनी समस्या बता सके और उसका समाधान ले  माता-पिता ऐसी होती है जो बच्चों को उत्साह से आगे बढ़ने की हिम्मत दे सकते हैं उसे बता सकते हैं कि तुम जीत जाओगे उसमें इतना तो साफ है कि उसका हमेशा सकारात्मक व्यवहार रहे ।हर चीज को वह सकारात्मक ढंग से देखें उसे इतना सहयोग दें कि वह सकारात्मक सोच की ओर बढ़ते हुए अपने प्रयास का शत प्रतिशत दे सके ।उसके काम की किसी भी परिस्थिति में अन्य बच्चों के साथ तुलना नहीं करनी चाहिए इससे कई बार बच्चे में नकारात्मक भाव पैदा हो जाते हैं और वह अपनी क्षमता को निकाल नहीं पाते जो  उसमें गुण है उन्हें अपने भीतर छुपा लेते  है जो उसके लिए हानिकारक होती है।              माता -पिता और बच्चे के बीच एक अपनेपन का आधारभूत रिश्ता होना चाहिए कि  माता -पिता और बच्चे  एक -दूसरे को समझने में और उनकी समस्याओं को बताने में झिझक महसूस ना करें।बच्चों के सामने कभी भी नकारात्मक सोच लेकर उन पर गुस्सा नहीं करना चाहिए और परिस्थितियों को समझते हुए उनका साथ देना चाहिए उन्हें कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित करना चाहिए और ना कि दूसरे बच्चों के साथ उनका तुलना कर उन्हें भीतर से छोटा महसूस करवाना चाहिए ।उन्हें अपने बच्चों के प्रयासों की प्रशंसा करनी चाहिए अगर वह गलती भी करते हैं तो उन्हें यह कभी भी जताना नहीं चाहिए कि वह यहां गलत है उस गलती को सुधारने में उनका सहयोग करना चाहिए                             बच्चों के स्वभाव की व्यवहारिकता  में उनके व्यवहार में ऐसे परिवर्तन क्यों आ रहा है इस ओर खास ध्यान देना चाहिए। उन कारणों को जानने की कोशिश करनी चाहिए जिन के कारण बच्चा इस प्रकार का व्यवहार कर रहा है । माता- पिता को उसके व्यवहार को समझना चाहिए ना कि उन पर चिल्लाना और उस पर गुस्सा करना चाहिए उसके व्यवहार में आई इन परिवर्तनों को जानने की कोशिश करनी चाहिए उसे उत्साहित करना चाहिए ताकि वह अपने माता-पिता से बिना किसी झिझक के अपनी समस्या बता सके और उसका समाधान ले पाए। माता-पिता  बच्चों को उत्साह से आगे बढ़ने की हिम्मत दे सकते हैं उसे बता सकते हैं कि तुम जीत जाओगे उनसे हमेशा सकारात्मक व्यवहार  करें। हर चीज को वह सकारात्मक ढंग से देखें उसे इतना सहयोग दें कि वह मेहनत की ओर बढ़ते हुए अपने मेहनत का शत प्रतिशत दे सके अपने काम को किसी भी परिस्थिति में बच्चे का अन्य बच्चों के साथ तुलना नहीं करनी चाहिए इससे कई बार बच्चे में नकारात्मक भाव पैदा हो जाते हैं और वह अपनी क्षमता को निकाल नहीं पता जो अपना उसमें गुण है उन्हें  छुपा के रखतें है जो उसके लिए हानिकारक होती है। अगर वह गलती भी करते हैं तो उन्हें यह कभी भी जताना नहीं चाहिए कि वह यहां गलत है उस गलती को सुधारने में उनका सहयोग करना चाहिए।          अभिभावकों को अपनी सोच को सकारात्मक रखना चाहिए अगर सकारात्मक सोच रखेंगे तभी अपने बच्चों का बहुपक्षीय विकास कर सकते हैं और उनकी समस्या को अच्छी प्रकार से सुलझा सकते हैं । बच्चों की हर परिस्थिति में सहयोग करना चाहिए ताकि वह अपने को कमजोर महसूस करते हुए गलत रास्ते पर ना चले जाएं अगर माता-पिता और बच्चों के बीच वार्तालाप होता रहे तो बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जो स्वयं खत्म हो सकती हैं।         आज ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से बहुत -सी समस्याएं आ रही है ।माता-पिता को अपने  रोजमर्रा के काम  बच्चों की शिक्षा उनकी प्रतिदिन की प्रतिक्रियाओं संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। मेडिटेशन के द्वारा भी काफी हद तक समस्याओं को दूर किया जा सकता है बच्चों और माता-पिता को इस हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए कि वह कुछ समय मेडिटेशन में लगाए जिससे उन्हें शांति प्राप्त होगी और कई समस्याओं का हल  निकल पाएगा ।माता-पिता को अपने काम और समस्याओं की झुंझलाहट पर गुस्सा बच्चे पर किसी भी अवस्था में नहीं निकालना चाहिए चाहे वह कितने ही अपने काम से परेशान हूं लेकिन बच्चों के सामने इन परेशानियों को दिखाना नहीं चाहिए क्योंकि बच्चों में यह समझ नहीं होती और वह उससे और ज्यादा परेशान हो जाते हैं माता-पिता को बच्चों के सामने हमेशा सकारात्मक सोच रखनी चाहिए ताकि वह बच्चे को आगे बढ़ता हुआ देख सकें क्योंकि अगर वह पॉजिटिव एटीट्यूड के नहीं होंगे तो बच्चे को भी इस और प्रेरणा नहीं दे पाएंगे क्योंकि एक सकारात्मक सोच ही दूसरे को सकारात्मक सोच की और भेज सकती है।                          कोरोना काल में  जब बच्चे अभिभावकों के साथ  ज्यादा समय बिता रहे हैं।ऐसे समय में बच्चे औंर अभिभावक एक -दूसरे  को करीब से समझ सकते है।और मस्ती करते हुए अभिभावकों के साथ खेल -खेल में अपना मनोरंजन कर सकते हैं। इससे दोनों के बीच में सामंजस्य पैदा होगा और व्यवहारिकता के कारण वह एक दूसरे को समझने में सक्षम होंगे।     कोरोना काल ने घरेलू शिक्षा और परंपरागत शिक्षा दोनों का स्वरूप स्पष्ट किया कि कोरोना काल में बच्चे ऑनलाइन घरेलू शिक्षा से ही अध्ययन कर रहे हैं। स्कूल जाने और परंपरागत तरीके से शिक्षा पाने में असमर्थ है ।परंपरागत तरीके से शिक्षा द्वारा बच्चे ज्यादा अच्छी तरह से सीखते हैं। अन्य बच्चों के साथ रह कर बहुत कुछ सीखते हैं और अब वह सीखने का सारा दायरा ऑनलाइन के घेरे में आ गया है। शुरू- शुरू में तो यह बच्चों के लिए रोचक था लेकिन अब बच्चों में अवसाद की भावना पैदा हो रही है वह अपने दोस्तों के साथ खेलना चाहते हैं।कोरोना से पहले के जीवन को फिर से वैसे की तरह जीना चाहते हैं।इस स्थिति में  अगर माता-पिता बच्चों को प्रोत्साहित करने और सकारात्मक सोच रखते हुए उन का साथ देते है तो जीवन की निराशा के इस दौर में  बच्चे के जीवन में सकारात्मकता लाने में सक्षम हो सकते है। 

नालागढ़, हिमाचल प्रदेश