श्रीराम काॅलेज आफ फार्मेसी के निदेशक डा0 गिरेन्द्र कुमार गौतम द्वारा इजाद हर्बल औषधी को मिला पेटेंट


शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। श्री राम कॉलेज ऑफ फार्मेसी के निदेशक डा0 गिरेन्द्र कुमार गौतम द्वारा आँतों के संक्रमण से निदान के लिये इजाद की गई औषधी को भारत सरकार के बौद्धिक संपदा विभाग द्वारा पेटेंट किया गया। यह पेटेंट भारत सरकार के द्वारा हर्बल दवाइयों के निर्माण कार्य हेतु 20 साल के लिए प्रदान किया जाता है। डॉ गौतम ने अपनी खोज के बारे में बताते हुये कहा कि यह हर्बल फॉर्मूलेशन दो प्रकार के एक्सट्रैक्ट से मिलकर बना है जिसमें दो स्वदेशी पौधों का इस्तेमाल किया गया है ट्राइकोसेन्यीस के बीज एवं प्रुनसपर्सिका पत्तियों से इस फॉर्मूलेशन को तैयार किया गया है जिस में सक्रिय रासायनिक घटक मौजूद रहते हैं तथा यह इष्टतम अनुपात मे हैलिमिन्टिक्स को मारता है। एंटेलमिटिक्स या ऐटोहेल्मिन्थिक्स दवाओं का एक समूह है, जो परजीवी कीडे़ (हेल्मिन्यस) और शरीर के अन्य आंतरिक परजीवो को मारकर तथा मरीज को बिना नुकसान पहुॅचाये निष्कासित करते है। इस प्रकार की दवाईयाॅं वृमीफ्यूज या वृमीसाइटस भी कहलाती है। एंटेलमिटिक्स का उपयोग उन लोगो के इलाज के लिये किया जाता है जो हैलिमिन्टिक्स से संक्रमित होते है। इन दवाईयों का उपयोग संक्रमित जानवरों के इलाज के लिये भी किया जाता है। यह फॉर्मूलेशन प्राकृतिक होने के कारण उन सभी दुष्प्रभावों से मुक्त होगा जो पिपराजीन सिट्रेट, एल्बेंडाजोल आदि सिंथेटिक दवाओं के कारण हो सकते हैं। यह दवा पेट की आँतों में होने वाले संक्रमण को खत्म करने में लाभदायक है।
इस हर्बल फॉर्मूलेशन की खोज  6 सदस्यों की एक टीम ने की जिसमें डा0 गिरेन्द्र कुमार गौतम के साथ आईटीएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी गाजियाबाद के प्रोफेसर डॉ एस सदीश कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ नितिन कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ प्रवीण कुमार गौड़, असिस्टेंट प्रोफेसर मिस्टर प्रसून कुमार सक्सेना एवं एमआईटी मेरठ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अनुराग चौधरी शामिल  है।



इस अवसर पर श्रीराम ग्रुप आफ कालिजेज के चेयरमैन डा0 एससी कुलश्रेष्ठ ने श्रीराम काॅलेज आफ फार्मेसी के निदेशक डा0 गिरन्द्र कुमार गौतम को बधाई देते हुए कहा कि यह श्रीराम परिवार के लिये बडा ही हर्ष का विषय है कि श्रीराम काॅलेज आफ फार्मेसी के निदेशक डा0 गिरेन्द्र कुमार गौतम द्वारा बनाई गई दवाई को भारत सरकार द्वारा पेटेंट दिया गया। उनके द्वारा अविष्कार की गई यह दवाई मानव शरीर की आँतों में होने वाले इंस्फेक्सन को ठीक करने में कारगर है। उन्होंने कहा कि मुझे बडा ही गर्व की अनुभूति हो रही है कि श्रीराम काॅलेज आफ फार्मेसी अपनी सफलता के चरम पर बहुत जल्दी पहुॅच जायेगा ऐसी मेरी आशा है। साथ ही उन्होंने कहा कि श्रीराम काॅलेज आफ फार्मेसी के सभी अध्यापक सभी विद्यार्थियों को समय-समय पर इसी प्रकार प्रयोगात्मक अविष्कारों को लगातार कराता रहे जिससे विद्यार्थियों के बौद्धिक स्तर में वृद्धि होती रहे। अंत में उन्होंने फार्मेसी के सभी अध्यापकों को शुुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर श्रीराम काॅलेज के निदेशक डा0 आदित्य गौतम ने श्रीराम काॅलेज आफ फार्मेसी के निदेशक द्वारा डा0 गिरेन्द्र को बधाई देते हुये कहा कि उनके द्वारा बनाई गई दवाई मानव जाति के कल्याण के लिये भविष्य में कारगर साबित होगी।
डा0 गिरेन्द्र कुमार गौतम ने कहा की किसी भी यूनीक आइडिया को पेटेंट कराना जरूरी है, क्योंकि आपका आईडिया दुनिया बदल सकता है, साथ ही उन्होंने कहा कि आइडिया का बल्ब तो किसी के भी दिमाग में जल सकता है, पर आविष्कार उसी का माना जाता है, जो उसे ऑफिसली रजिस्टर्ड कराता है, आविष्कार को दर्ज कराने की इस प्रक्रिया को ही पेटेंट का नाम दिया जाता है।
इस अवसर पर श्रीराम काॅलेज आफ फार्मेसी के प्रवक्तागण अवनिका त्यागी, श्वेता पुंडीर, टींकु कुमार, सोनू कुमार, छवि गुप्ता, रोहित मलिक, अमल कुमार, शफकत जैदी, रोहिणी गुप्ता, सलमान, उज्जवल, शिवम कुमार और रवि आदि मौजूद रहे।