साहित्य साधक मंच पर सम्मान समारोह आयोजित

निक्की शर्मा रश्मि, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। 

 

हिंदी दिवस के अवसर पर साहित्य साधक अखिल भारतीय साहित्य मंच पर दिनांक 14 सितंबर 2020 को एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस सम्मान समारोह का प्रारंभ राष्ट्रीय अध्यक्ष शशिकांत "शशि" के द्वारा मां शारदे को माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलन और सपना सक्सेना दत्ता की सरस्वती वंदना से हुआ।

सम्मान समारोह दो चरणों में आयोजित हुआ। पहले चरण में "नशा ले जाता गर्त में" शीर्षक पर वेबीनार के माध्यम से आयोजित काव्य पाठ के प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।  कृष्ण कुमार क्रांति के मंच संचालन में सपना सक्सेना दत्ता द्वारा प्रतिभागियों को सम्मान-पत्र प्रदान किया गया। "नशा ले जाता गर्त में" शीर्षक पर काव्य पाठ प्रस्तुत करने वाले सम्मानित रचनाकारों में रणविजय यादव, नीलम व्यास, राधा तिवारी राधे गोपाल, दर्शन जोशी, सपना सक्सेना दत्ता, व्यंजना आनंद, संतोष सिंह हसोर, डॉ राणा जयराम सिंह प्रताप, दीपक क्रांति, दिनेश पांडेय, वशिष्ठ प्रसाद, अमर सिंह निधि, निक्की शर्मा रश्मि तथा डॉ राजेंद्र सिंह विचित्र थे।


सम्मान समारोह के दूसरे चरण में हिंदी दिवस पर आयोजित काव्य लेखन हेतु डॉ.राणा जयराम सिंह 'प्रताप' के द्वारा राष्ट्रीय स्तर के रचनाकारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। हिंदी दिवस पर सम्मानित होने वाले कलमकारों में सर्वेश उपाध्याय सरस, अवधेश कुमार वर्मा, पुनीत कुमार, संदीप कुमार विश्नोई, सारिका विजयवर्गीय वीणा, मीना विवेक जैन, राम बिहारी पचौरी, डॉ असीम आनंद, सौरभ पांडे, अमित कुमार बिजनौरी, डॉ लता, प्रीति चौधरी मनोरमा, सुभाष चंद्र झा, प्रखर शर्मा, चंद्रगुप्त नाथ तिवारी, ज्योति भास्कर ज्योतिर्गमय, अनुराग दीक्षित, संतोष कुमार वर्मा, जयश्री तिवारी, अश्विनी कुमार शर्मा, रितु प्रज्ञा, अनवर हुसैन, सुमित दास रंजन,सीतादेवी राठी एवं अन्य कलमकार शामिल हुए। 

मंच संस्थापक कृष्ण कुमार क्रांति ने कहा मंच पर उपस्थित शीर्ष साहित्यकारों से नवांकुर साहित्यकारों को सदैव कुछ न कुछ सीखने का प्रयास करते रहना चाहिए। इस प्रकार के कार्यक्रमों से नवांकुर कवियों में उत्साह का जागरण होता रहता है और वह रचना के लिए प्रेरित होता है। हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर कृष्ण कुमार क्रान्ति ने निम्न पंक्तियों के द्वारा उद्गार व्यक्त किया-

हिंदी बोलें हर मानव, तब पूरी होगी मन की आशा।

हिंदी है भारत की भाषा, बढ़े अविरल है अभिलाषा।।

जन-जन से है यही अपेक्षा,करें नहीं हिंदी की उपेक्षा ।

साहित्यकार सृजन करें हिंदी, नित निखरे नभ निर्झर हिंदी।।


मंच के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. राणा जयराम सिंह 'प्रताप' ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आजादी के इतने लंबे समय बीत जाने के बावजूद भी हमारी हिंदी को जो जगह व प्रतिष्ठा मिलनी चाहिए, वह अभी तक नहीं मिल पाई है। बहुत ही अफसोस के साथ यह व्यक्त करना पड़ रहा है कि अभी भी हमारी हिंदी जो जन-मानस की भाषा है, को अपनी वांछित पहचान व प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए इन्तज़ार करना पड़ रहा है। राष्ट्र के राजनयिकों एवं पुरोधाओं को इस ओर ध्यान देने की सख्त आवश्यकता है। हम साहित्यकार भी अपना साझा प्रयास तब तक जारी रखेंगे, जब तक हिन्दी को वांछित प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं हो जाती है। डाॅ. राणा ने अपने सम्बोधन में उत्कृष्ट रचना प्रस्तुत करने हेतु सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया और उन्हें बधाई दी।

 

मुंबई, महाराष्ट्र