महिला काव्य मंच की गोष्ठी में गरजी डॉ. वन्दना शर्मा, बोली-देश की बेटी ललकार रही है

डॉ. शम्भू पंवार, नई दिल्ली। महिला काव्य मंच फरीदाबाद इकाई द्वारा आयोजित डिजिटल काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ ज्योति राज तथा संचालन वंदना गोयल ने किया। कार्यक्रम आरंभ होने से पहले उपाध्यक्ष निर्मला शर्मा के भाई डॉ. मुकेश गंभीर की धर्म पत्नी के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय महासचिव डॉ दुर्गा सिन्हा उदार व हरियाणा सचिव डॉ विनीता मेहता की विशेष रूप से उपस्थित रही। इकाई की अध्यक्ष डॉ.वंदना शर्मा ने कार्यक्रम का संयोजन किया।

गोष्ठी का शुभारंभ डॉ. वंदना शर्मा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात ध्येय गीत इकाई की कार्यकारिणी सदस्य शशि रंजना 'गीत' द्वारा प्रस्तुत किया गया। मेहमान कवियों के रूप में ज्योत्स्ना सिंह, रजनीश गोयल, रेखा जोशी तथा रेनू भाटी उपस्थित रहे। कवियों ने अपनी बेहतरीन रचनाओं की सुंदर प्रस्तुति देकर मंच को काव्य के रंग से सरोबार कर दिया।


डॉ दुर्गा सिन्हा उदार ने कहा-

हम हिन्दीमय संसार बनाएँगे, विश्व एक परिवार बनाएँगे,

एक सूत्र में बँधेंगे हम सब ही, बन ’उदार’ हिन्दी अपनाएँगे

डॉ ज्योति राज ने कहा-

विषमताएँ बहुत हुईं

समानता की है अब दरकार 

नारी को अब चाहिए 

सम्मान, प्रेम और समता का व्यवहार

डॉ.वंदना शर्मा ने कहा-

स्वतंत्र, सभ्य देश की बेटी, ललकार रही है मां तुझे,

सबल  हो गई हूं मैं, पर बेहतर कर दे आज मुझे

नीलम दुग्गल नरगिस ने कहा-

घास थी मैं

उग जाती कहीं भी

वंदना गोयल की पंक्तिया काफी सराही गई-

यादों के बैरन साये जब आकर पांवों से लिपट गये

आसमा कौल की पंक्तिया-

यह बता दें कौन अपना

और पराया कौन है

स्वर किसी के हैं मुख्रर

और कोई मौन है

मधु गुप्ता ने कहा-

भाषाओं में सर्व शिरोमणि, मेरी हिंदी रानी,

सरस,सुहावन,मीठी लागे, तेरी ऐसी वाणी

डॉ विनीता मेहता ने कहा- 

कितना मुश्किल होता है अपने आप को खत्म करना

डॉ बबिता गर्ग सहर ने कहा-

जिंदगी तू तो तभी तक खास है,

जब तलक अपना हमारे पास है

रेखा जोशी ने कहा-

जो न समझे प्यार उसको प्रियतम कैसे कहूँ

जी सके हम जो नहीं वह जिंदगी कैसे कहूँ

रेनू भाटी ने कहा-

अ समाज मुझे बतला, मेरे ग़म की कहानी है,

परधान पुरूष क्यूं है, नारी क्यूं बेगानी है

ज्योत्स्ना सिंह ने कहा

कोशिश वो कर रहे हैं मगर जानती हूँ  मैं 

मुरझाया फूल उनसे खिलाया न जायेगा

रजनीश गोयल ने कुछ इस तरह कहा-

मुहब्बत में महबूब पर दिल निसार करना चाहिए।

डरना क्या जब हो गया तो प्यार करना चाहिए

शशि रंजना शर्मा ने कहा- 

मेरे वीरों सलाम है तुमको

देश सेवा ही काम है तुमको


कार्यक्रम के अंत में वंदना गोयल ने गोष्ठी में आये सभी गुणीजनों का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का निर्देशन राज्य सचिव डॉ. विनीता मेहता द्वारा किया गया।