बंजारों को विशेष जाति का दर्जा देने की मांग

बंजारा आरके राठोर एडवोकेट, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

भारतीय संस्कृति, परंपरा में बंजारों का मान अभिमान क्षत्रिय कुल से रहा है। 12वीं शताब्दी से बंजारा शूरवीर,युद्ध कौशल, युद्ध कला में माहिर तथा राजाओं के अंगरक्षक बने तथा सत्ता पर काबिज हुए, परंतु इतिहास के पन्ने हमें कदाचित दलित (शूद्र) कहना बंजारा शौर्य इसकी इजाजत नहीं देता।  दुखद है कि बंजारों का इतिहास या तो दबा दिया गया या फिर तोड़ मरोड़ कर पेश कर दिया गया। इस पर वर्तमान में चिंतन व आवाज उठाने की आवश्यकता है, क्योंकि आजादी के बाद राष्ट्र निर्माताओं ने हमारे इतिहास की अवहेलना की और तथ्य मिटा दिए।

सन 1947 के आजादी के दौर में बंजारों के कार्यों, व्यापार को साक्षी मानकर व कम आकलन कर संपूर्ण भारत में बंजारों के साथ घोर अन्याय किया तथा 23 उप जातियों में बंजारों का विभाजन कर, राजनीतिक नेताओं ने लाभ कमाया। हमें क्षत्रिय कुल से शूद्र बना डाला, जिसको हमें वर्तमान में खंडन करना चाहिए तथा सरकार से मांग करनी होगी कि हमें विशेष जाति का दर्जा देकर सम्मानित किया जाये।

 

राष्ट्रीय अध्यक्ष लीगल सेल, आल इंडिया विमुक्त जाति चैरिटेबल फाउंडेशन

अध्यक्ष दिल्ली प्रदेश ऑल इंडिया बंजारा सेवा संघ