संस्कृति सरक्षण एवं जागरूकता में अहम भूमिका निभा रहा देव संस्कृति को समर्पित सोशल मीडिया पेज थाची वैली ऑफ गाॅड

टीसी ठाकुर, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

थाची वैली ऑफ गाॅड यानी भगवान के वास का स्थान भगवान के वास की घाटी थाची वैली हिमाचल प्रदेश के जिला मण्डी के उपमण्ङल सराज के थुनाग से लगभग 75  किलोमीटर की दूरी पर समुद्र तल से करीब 8000 फुट की ऊंचाई पर वसी एक खूबसूरत घाटी है। यह संम्पूर्ण घाटी यहाँ के देवी देवताओं को समर्पित है। यहाँ हर गांव में अपने-अपने स्थानीय देवी-देवता है, जिसमें श्री बिट्टठू नारायण जी, बड़ा देव मतलोङा जी, चुजवाला महादेव, पुण्डरीक ॠषि, हिडिम्बा माता, कश्मीरी माता, भणभासन माता आदि मुख्य है। थाची वैली में मुख्यतः श्री बिट्टू नारायण जी मुख्य देवता के रूप में पूजे जाते है।


आज के इस आधुनिक युग में बहुत सारे लोग घर बैठे ही देवी देवताओं के लाईव दर्शन करते है, जिसके लिए हर गांव व शहर आज सोशल मीडिया व इंटरनेट से जुड़ा है। आज के समय में देवी देवताओं के ऑनलाइन दर्शन के लिए बहुत सारे सोशल मीडिया पेज बने है, जिसके माध्यम से से घर बैठे ही देवी-देवताओं के दर्शन व जानकारी प्राप्त हो जाती है। इसी का एक मुख्य उदाहरण "थाची वैली ऑफ गाॅड" का सोशल मीडिया पेज है, जो कि आज हिमाचल प्रदेश ही नहीं, बल्कि बाहरी राज्यों के लोगों को भी हिमाचल की संस्कृति व देवी देवताओं के लाईव दर्शन करवाते है। थाची वैली ऑफ गाॅड की शुरुआत वर्ष 2010 में श्री दिनेश शर्मा जी के द्वारा की गई।


दिनेश शर्मा हमेशा ही देव संस्कृति के संरक्षण लिए लोगों को प्रेरित व जागरूक करते है और स्वयं भी देव संस्कृति सरक्षण के लिए कार्य कर रहे है। ये समय समय पर विभिन्न मंदिरों के कारदारों के द्वारा भी अपने पेज में लाईव आकर लोगों को देव संस्कृति के प्रति जागरूक करते रहते है। थाची वैली ऑफ गाॅड का मुख्य उद्देश्य है कि लोग वर्तमान के इस आधुनिक समय में देव संस्कृति को जाने और इसको संजोये रखे, क्योंकि आधुनिकता के इस दौर में देखा है कि लोगों की दिलचस्पी देव संस्कृति के प्रति कुछ हद तक कम हो गई है।


थाची वैली ऑफ गाॅड के संस्थापक ( एडमिन ) दिनेश शर्मा जी बताते है कि 2010 से लेकर हम अब तक अपने विभिन्न लाईव जागरूक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को देव संस्कृति के प्रति जागरूक कर रहे है। वह बताते है कि वर्तमान समय में थाची वैली ऑफ गाॅड के साथ करीब एक लाख लोग सीधे तौर पर जुङे है, जो कि हिमाचल प्रदेश के साथ साथ बाहरी राज्यों से भी है।

हाल ही में कोविड-19 के दौरान लाॅकडाउन के चलते इन्होने अपने पेज के माध्यम से लाईव एक अभियान चलाया, होंसले में रहें, घोंसले में रहें। इस घोष के साथ इन्होंने कोविड -19 के दौरान बढते खतरे के चलते लोगों को अपने पेज से लाईव प्रोग्राम देकर लोगों को इसके प्रति भी काफी जागरूक किया। इनके इस अभियान को हिमाचल में काफी सराहा गया।

दिनेश शर्मा बताते है कि इस टीम में उनके साथ उनके साथियों ने भी अहम भूमिका निभाई, जिसमें राकेश शर्मा, पुजारी बिट्टू नारायण, पत्रकार पुरुषोत्तम पंकज शर्मा, सचिन शर्मा पाचङु माता कश्मीरी मुराह का महत्वपूर्ण योगदान है और यह  टीम के सदस्य भी है। दिनेश शर्मा बताते है कि आने वाले भविष्य में भी लोगों को अपने पेज के माध्यम से देव संस्कृति के संरक्षण के लिए इसी तरह अभियान चलाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि सभी लोग इसी तरह हमारे साथ लगातार जुङे रहे और देव संस्कृति का संरक्षण करें।


कारदार च्वासीगढ़, करसोग (मण्डी) हिमाचल प्रदेश