राधा - कृष्ण


प्रीति शर्मा "असीम", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।


 

हम जब अपने ,

अस्तित्व से ऊपर हो ।

अपना साक्षात्कार पा जाते है।

 

ईश्वर आधाररूप प्रेम हो जाते है।

उस क्षितिज बिंदु पर,राधा हो जाते है।

 

जब समर्पित हो जाते है,

 प्रेम का आसित्व हो जाते हैं ।

वो प्रेम में रमे ,

हृदय राधा  हो जाते है।

 

जो ध्येय को समर्पित हो,

ध्यान पा जाते है।।

उसी में एकीकार हो , 

राधा कृष्ण, 

कृष्ण राधा हो जाते हैं।

 

नालागढ़,  हिमाचल प्रदेश