पुरानी कहावत "चित भी अपनी, पट भी अपनी और अंटा मेरे बाप का" की तर्ज पर चल रही विद्युत विभाग के अफसरों की कार्यशैली


शि.वा.ब्यूरो, खतौली। गांवों में एक पुरानी कहावत है कि चित भी अपनी, पट भी अपनी और अंटा मेरे बाप का। विद्युत विभाग के अफसर भी कुछ इसी तर्ज पर अपनी अफसरी को अंजाम दे रहे हैं। बिजली विभाग के कर्मचारी अपने हिसाब से नियम कानून बना लेते हैं, चाहें जनता को कितनी भी परेशानी क्यों न हो और विभागीय अफसर हैं कि वे अपने कर्मचारियों से काम लेना तो दूर उनकी गलतियों पर पर्दा डालने और पीड़ितों को कार्यवाही का झांसा देने को ही अपनी ड्यूटी मान रहे हैं।
बता दें कि शिक्षा वाहिनी ने विद्युत विभाग के कर्मचारियों द्वारा दोपहर 1 बजे तक ही बिजली का बिल जमा कराये जाने के विषय में एक समाचार प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशन से पूर्व मौके पर मौजूद रहकर विभाग के अधिशासी अभियंता और पश्चिमांचल विद्युत परिषद के प्रबन्ध निदेशक से विद्युत विभाग के कर्मचारियों की मनमानी से अवगत कराते हुए उनके ही कथनानुसार 3 बजे तक विद्युत बिल जमा कराये जाने का अनुरोध किया था, लेकिन विभागीय ये आला अफसर भी अपने कर्मचारियों से दोपहर 1 बजे के बाद नियम के बावजूद विद्युत बिल जमा कराने में असमर्थ रहे थे। अधिशासी अभियंता ने सम्बन्धित कर्मचारी के खिलाफ डिसीप्लीनरी एक्शन लेने की बात कहते हुए अगले दिन बिजली का बिल जमा कराने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया था। 



उक्त के सम्बन्ध में एक सप्ताह बाद जब विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता सोनम सिंह से उनके कार्यालय में कृत कार्यवाही के बारे में जानकारी की गयी तो उन्होंने बताया कि मामले की जांच करायी जा रही है। साथ ही साथ उन्होंने बताया कि प्रतिदिन तीन बजे तक ही बिल जमा किये जा रहे हैं। जिसका प्रमाण उनके पास मौजूद है। जब उनसे कहा गया कि इसका मतलब तो आपको मौके पर ही दी गयी सूचना और आप द्वारा अगले दिन बिल जमा कराने व आप द्वारा सम्बन्धित कर्मचारी के खिलाफ डिसीप्लीनरी एक्शन लेने की बात भी झूठी है। इस बात पर वे बगले झांकने लगे। इसी समय वहां मौजूद उपखण्ड़ अधिकारी ने भी अपने अफसर का पक्ष लेते हुए कहा कि बिल तीन बजे तक ही जमा किये जा रहे हैं। जब उपखण्ड़ अधिकारी का ध्यान उनके कार्यालय में बिल जमा करने की विंडो के पास चस्पा बिजली के बिल एक बजे जमा होने सम्बन्धी नोटिस की ओर दिलाया गया तो उन्होंने कहा कि वह नोटिस तो पुराना है। इस पर जब उनसे यह जानने का प्रयास किया गया कि क्या पहले बिजली के बिल एक बजे तक जमा होते थे तो वे इसका कोई जवाब नहीं दे पाये।
जानकारों की मानें तो बिजली विभाग के अधिकारियों के ढुलमुल रवैये के चलते ही विभागीय अफसरों व कर्मचारियों के सम्मान को अक्सर ठेस लगती रहती है। शायद अभी हाल में एक विभागीय जेई के साथ की गयी अभद्रता इसी का परिणाम है।