मखमल छगड़, रेशम पगड़ी

उदय उमराव, शिक्षा वाहनी समाचार पत्र।

 

किससे बात कहें हम बोलो,

मदहोश सभी हैं 'सत्ते' में।

मखमल छगड़ी-रेशम पगड़ी,

मजदूर सभी हैं 'लत्ते' में।।

 

भखने का कहीं पता नहीं,

संग चखने हैं मयखाने में।

टिड्डी दल हैं लगे हुए सब,

चाट-चाट कर खाने में।

तू भी चाट के खा ले प्यारे,

शेष  बचे जो  'पत्ते'  में।।

मखमल छगड़ी रेशम पगड़ी,

मजदूर सभी हैं'लत्ते'में।।

 

लाकडाउन मयखाने खुल गए,

मयकश करते मय क्रीड़ा।

हम-वतन हम हुए प्रवाशी,

किसे सुनाएं हम पीड़ा।

ऐ मदनी! पदचाप सुनो अब,

दिल्ली की 'कलकत्ते' में।।

मखमल छगड़ी रेशम पगड़ी,

मजदूर सभी हैं 'लत्ते' में।।

 

मजदूर सभी हैं उपले पाथें,

भोजन रोज पकाने को।

मशहूर सभी हैं जुमले पाथे,

बहुजन रोज रिझाने को।

बिन चूना तरसे नाज़ुक पान,

सब चूना लगा दिया 'कत्थे' में।।

मखमल छगड़ी रेशम पगड़ी,

मजदूर सभी हैं'लत्ते'में।।

 

किसके खातिर हुई उगाही,

गया है किसके पाले में।

बह गई सबकी भूख-प्यास,

है ,लाकडाउन के नाले में।

प्रहरी बैठा मौन बिछाए,

नज़र गड़ाए 'भत्ते' में।।

मखमल छगड़ी रेशम पगड़ी,

मजदूर सभी हैं'लत्ते'में।।

 

ज्यादा अब कुछ पाना कह,

तेरे बस की बात नहीं।

'उदय' अब औकात में रह,

सर तेरे कोई हाथ नहीं।

दुबक-दुबक कर जी ले प्यारे,

है हाथ बर्र के 'छत्ते' में।।

मखमल छगड़ी रेशम पगड़ी,

मजदूर सभी हैं'लत्ते'में।।

 

प्र०अ० प्राथमिक विद्यालय मदुरी, घाटमपुर कानपुर नगर