जीवन संघर्ष 

उमा ठाकुर, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

संघर्ष की भट्टी में तप कर 

मुकाम  यह तुमने पाया था 

सतरंगी सपनों से जीवन

अपना महकाया था. 

होगीं  मज़बुरियां, 

दर्द कुछ सहा होगा

फिल्मी डायलॉग बहुत बोले 

मगर कुछ अनकहा सा रहा होगा 

सब लड़ रहे इस कोरोना काल में 

अपने अपने  हालात से

तुम भी लड़ लेते उस पल से

जो भीतर गहरे उतरा था तुम्हारे 

तो वॉलीबुड का चमकता सितारा

यूं आसमान में न चमक रहा होता

युवा जो लॉकडाउन में 

छिछोरे देख उभरे थे अवसाद से,

पूछ रहे बस यही सवाल

क्यों ? आखिर क्यों?

माँ की आंखों में पसरा मौन 

बस यही कहना चाहे

कि रियल लाइफ में कोई रिटेक नहीं होता.

 


आयुष साहित्य सदन पंथाघाटी शिमला हिमाचल प्रदेश