एसडीकालेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलोजी में 1 जून से आयोजित सात दिवसीय वेबिनार संपन्न


शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। एसडीकालेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलोजी 1 जून से आयोजित सात दिवसीय वेबिनार का समापन हो गया। वेबिनार का मुख्य विषय इम्पेक्ट ऑफ कोविड-19 ऑन इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलोजी रहा।
इस अवसर पर संस्थान के अधिशासी निदेशक प्रो0 (डा0) एसएन चौहान ने वेबिनार के मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि कोविड-19 ने विज्ञान, तकनीक एवं इंजीनियरिंग की उपयोगिता को और अधिक बढ़ा दिया है। कोरोना वायरस के प्रकोप से आर्थिक, सामाजिक गतिविधियों के साथ सर्वाधिक प्रभाव अध्ययनशील बालक व बालिकाओं पर पड़ा है, चाहे वे प्राथमिक स्तर से उच्च शिक्षा तक किसी भी पाठ्यक्रम में अध्ययन कर रहे है। उन्होंने कहा कि टैक्नोलोजी ने ही आज युवाओं को उत्साहित रखा है। ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से सर्वत्र छात्र-छात्राओं को अनवरत पढ़ाई से जोड़ने का काम किया जा रहा है। आगे आने वाले समय में तकनीक का उपयोग हर क्षेत्र में बढ़ेगा। अतः इंजीनियरिंग एवं तकनीक का ज्ञान 21वीं सदी की कुँजी बन चुकी है। 
संस्थान के मीडिया प्रभारी ने बताया कि पहले दिन के वेबिनार में कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष डा0 योगेश कुमार शर्मा मुख्य वक्ता रहे। डा0 योगेश कुमार शर्मा ने बताया कि किस तरह से कोविड-19 का अस्तित्व पता करने के लिये कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग कार्य करता है। यह कार्य मुख्यतः रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स, रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग पर आधारित होता है। इस सत्र में 31 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। मीडिया प्रभारी ने बताया कि दूसरे दिन के वेबिनार में इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन की विभागाध्यक्ष डा0 प्रगति शर्मा मुख्य वक्ता रही। डा0 प्रगति शर्मा ने नई तकनीक जैसे-इन्फ्रारेड थर्मामिटर, स्कैनर, अल्ट्रासोनिक सेनिटाइजर टनल के आविष्कार में उपयोग होने वाले सैन्सर्स के बारे में जानकारी दी। इस सत्र में 14 प्रतिभागी उपस्थित रहे। तीसरे दिन के वेबिनार में बायोटैक्नोलोजी विभाग के विभागाध्यक्ष डा0 नवीन द्विवेदी मुख्य वक्ता रहे। डा0 द्विवेदी ने बताया कि कोविड-19 को जड़ से खत्म करने के लिये भारत सरकार एवं डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रस्तावित दवाईयाँ एवं सेनिटाइजर का निर्माण बड़े स्तर पर करने की जरूरत है, जिसके लिये बायोटेकनोलोजी विभाग में रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे, जिसमें पीसीबी के छात्रों की जरूरत होगी। इस सत्र में 15 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। चौथे दिन के वेबिनार में इन्फारमेशन टैक्नोलोजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 अभिषेक राय मुख्य वक्ता रहे। प्रो0 राय ने बताया आईटी विभाग द्वारा कोरोना वायरस का पता करने के लिये भारत सरकार द्वारा तैयार आरोग्य सेतू ऐप किस तरह से कार्य करता है यह मुुख्यतः रूप से साॅफ्टवेयर इंजीनियर्स द्वारा तैयार किया गया है। इस सत्र में 46 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। पाँचवे दिन के वेबिनार में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष प्रो0 मनोज झा मुख्य वक्ता रहे। प्रो0 झा ने बताया किस तरह से मैकेनिकल इंजीनियर्स विभिन्न स्तर पर आटोमेटिक सेनिटाइजर मशीन एवं फेस शिल्ड इत्यादि का निर्माण करते है। इस सत्र में 13 प्रतिभागीयों ने हिस्सा लिया।


मीडिया प्रभारी ने बताया कि छठे दिन के वेबिनार में इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 अंकुर सक्सेना ने बताया कि विद्युत इंजीनियर्स को कोविड-19 के बाद अपने कार्यकलाप को किस प्रकार से सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है तथा भविष्य में एमएसएमई सेक्टर तथा मेक इन इंडिया के तहत मिलने वाले रोजगार के नये अवसरों के बारे में अवगत कराया। इस सत्र में 05 प्रतिभागीयों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर संस्थान के प्राचार्य डा0 एके गौतम ने कहा कि कोविड-19 से बचाव के लिये हमें मास्क और हैंड सेनिटाइजर को अपने जीवन में नियमित रूप से प्रयोग में लाना होगा और सोशल डिस्टेनसिंग का पालन करना होगा। भारत सरकार द्वारा दी जा रही सुरक्षा संबंधी जानकारी हाँसिल कर अपने आप को सुरक्षित रखें।