नई वैश्विक संस्कृति एवम भारत

डॉ. राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

    सम्पूर्ण इन दिनों विश्वव्यापी महामारी से त्रस्त है। विश्व के 118 देशों में कोविड-19 कोरोना वायरस कहर बरफ़ा रहा है। 90 फीसदी मामले चीन इटली कोरिया ईरान में आये हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को महामारी घोषित किया है। आइये जाने कि महामारी किसे कहते हैं। 

पैनेडेमिक यानि महामारी का अर्थ एक ही समय मे दुनिया के अलग अलग देशों में तेजी से फैल रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्यक्ष टेडरोज आद्यनोम ग्रेवेयसोस ने वायरस को लेकर जो निष्क्रियता देखी जा रही है ये चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि आज कुछ तो क्षमता की कमी से जूझ रहे हैं कोई संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं तो कोई इच्छाशक्ति की कमीं से जूझ रहे हैं। आज सभी देशों को चाहिए कि इस विश्वव्यापी महामारी के खतरों से कैसे बचाव करें ये बात जन जन तक पहुंचाएं।

  महामारी अधिनियम जब 1897 में बना था जिसके तहत सरकार ने महामारी पर नियंत्रण पाया था।

विश्व मे कोरोना से पहले भी महामारी आई थी। पहले प्लेग आया था जिसमे करोड़ो लोगों की मौत हुई थी।इटली में ब्लैक डेथ समुद्री जहाजों के चूहों द्वारा फैला था यूरोप एशिया अफ्रीका में यह फैला जिसमे 20 करोड़ लोग मर गए थे। हैजा महामारी भारत मे जब आई तो 10 लाख लोग मर गए थे।1918 में यूरोप में स्पेनिश फ्लू आया जिसमे 5 से 10 करोड़ लोग मरे थे। 2009 में स्वाइन फ्लू महामारी आई थी जिसमे कईं लाख लोग मरे थे। अब कोविड 19 कोरोना वायरस फैल रहा है जिससे सारा विश्व परेशानी झेल रहा है।

    इन दिनों कोरोना के कारण नई वैश्विक संस्कृति पनपने लगी है। लोग हाथ जोड़कर अभिवादन करने लगे हैं। प्रणाम करना सीख गए हैं। लगता है जैसे रामायण महाभारत का काल फिर से लौट आया हो। वही प्राचीन संस्कृति जिसमे हाथ जोड़कर प्रणाम करने का नियम था। लॉक डाउन में सब लोग अपने भीतर छिपी कला दिख रहे हैं कोई पेंटिंग बना रहा कोई वाद्य यंत्र बज रहा। कोई शास्त्र पढ़ रहा। कवि,लेखक कविताएं कहानी लिख रहे साहित्य सृजन में लगे हैं। संक्रमण से बचने के लिए घर मे रहें सुरक्षित रहे। लॉक डाउन के नियमों का पालन कर रहे हैं।  लोगों से दूरी कायम रखना बार बार हाथ धोना। लोगों के संपर्क में आने से बचना व संक्रमण से खुद को बचाना आज बेहद जरूरी हो गया है।घर से बाहर नहीं जाना। संक्रमण से बचना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

  माहमारी ने हमारी जीवन शैली बदल दी है। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए ताजा फल सब्जियां खाना। सुबह जल्दी उठकर सभी योग प्राणायामआसन करने लगे हैं। कोई किसी से हाथ नहीं मिलाता है। घर की छत पर सुबह शाम लोग टहलते नज़र आने लगे हैं। पूरे दिन घर पर रहना। माता पिता अब बच्चों के साथ पूरा समय बिता रहे हैं। जिससे रिश्तों में अपनत्व बढ़ा है। घर के बुजुर्गों की देखभाल व सेवा अच्छे से होने लगी है। चिलचिलाती धूप में सभी सदस्य घरोँ में एक साथ खेलते भोजन करते हैं। आपस मे बातचीत करने लगे हैं। इस प्रकार काफी बदलाव आए हैं।

  इन दिनों घर परिवार की आर्थिब व्यवस्था गड़बड़ा गई है। ऐसे में फिजूल खर्ची से बचने की जरूरत है। धोबी से कपड़े धुलवाना इस्त्री करवाना जैसे काम स्वयं कर बचत की जा सकती है। बाजार की खाने पीने की चीज़ों से बचें । घर पर ही बनाकर परिवार के सभी सदस्यों को ताजा व शुद्ध चीजें परोसे। सिलाई का कार्य खुद करें।मध्यम वर्गीय परिवार की गृहणियाँ घर की अर्थव्यवस्था सुधारने में मदद कर सकती है। इस प्रकार महामारी में भी आनन्द से शान्तिपूर्वक जीवन बिताया जा सकता है।

 



भवानीमंडी, राजस्थान